Category:
Politics (राजनीति)
State:
Rajasthan
2026-09-21 03:26:48
जयपुर। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव के बाद अब नगर निगमों, नगर परिषदों और नगरपालिकाओं में अध्यक्ष पदों को लेकर सियासी तस्वीर तेजी से स्पष्ट हो रही है। नाम वापसी के बाद प्रदेश के 32 नगरीय निकायों में अध्यक्ष पद निर्विरोध तय हो चुके हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इनमें 28 पद भाजपा, 2 कांग्रेस और 2 निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गए हैं।
राजस्थान निकाय चुनाव: निर्विरोध अध्यक्षों के बाद आज 273 निकायों में सत्ता की तस्वीर होगी साफ
जयपुर। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव के बाद अब नगर निगमों, नगर परिषदों और नगरपालिकाओं में अध्यक्ष पदों को लेकर सियासी तस्वीर तेजी से स्पष्ट हो रही है। नाम वापसी के बाद प्रदेश के 32 नगरीय निकायों में अध्यक्ष पद निर्विरोध तय हो चुके हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इनमें 28 पद भाजपा, 2 कांग्रेस और 2 निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गए हैं।
इन निर्विरोध चुनावों के बीच खास चर्चा उन निकायों को लेकर है, जहां किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। ऐसे निकायों में निर्दलीय पार्षदों का समर्थन अध्यक्ष पद के चुनाव में महत्वपूर्ण हो गया। कुछ रिपोर्टों में भाजपा द्वारा ऐसे 18 निकायों में समर्थन जुटाकर अध्यक्ष पद हासिल करने की रणनीति का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इसे राजनीतिक दलों की रणनीति के रूप में ही देखा जाना चाहिए; किसी कथित दबाव या अनियमितता की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
आज 273 निकायों में अध्यक्ष पद का फैसला
राज्य में सोमवार को 273 नगरीय निकायों में महापौर, सभापति और चेयरमैन पदों के लिए चुनाव होने हैं। मतदान सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक होने के बाद मतगणना की प्रक्रिया होगी। पांच नगर निगमों—उदयपुर, बीकानेर, अलवर, पाली और अजमेर—में महापौर पद के लिए भी मुकाबला है।
बहुमत वाले और त्रिशंकु निकायों पर नजर
चुनाव परिणामों के बाद कई निकायों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा बहुमत बना है, जबकि कुछ स्थानों पर निर्दलीय पार्षद निर्णायक स्थिति में हैं। यही कारण है कि दोनों प्रमुख दलों ने अपने पार्षदों को एकजुट रखने के लिए अलग-अलग स्तर पर रणनीति बनाई है।
बीकानेर में कांग्रेस के पास 42 और भाजपा के पास 27 पार्षद बताए गए हैं। वहीं पाली में कांग्रेस के 29 और भाजपा के 21 तथा अजमेर में कांग्रेस के 37 और भाजपा के 32 पार्षद हैं। ऐसे में इन नगर निगमों के महापौर चुनाव में पार्षदों के समर्थन का समीकरण महत्वपूर्ण रहेगा।
जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों में कुछ मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान के कारण महापौर चुनाव की प्रक्रिया बाद में होगी। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार इन क्षेत्रों में लंबित प्रक्रिया पूरी होने के बाद अध्यक्ष पदों का चुनाव कराया जाएगा।
राजनीतिक प्रबंधन और निर्दलीयों की भूमिका चर्चा में
राजस्थान के निकाय चुनाव में इस बार बड़ी संख्या में निर्दलीय पार्षद भी निर्वाचित हुए हैं। ऐसे में जिन निकायों में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, वहां निर्दलीय पार्षदों का समर्थन बोर्ड गठन में निर्णायक बन सकता है। निर्विरोध निर्वाचन के आंकड़े भी बताते हैं कि कई निकायों में अध्यक्ष पद पर मतदान की नौबत ही नहीं आई।
अब निगाहें उन निकायों पर हैं जहां आज मतदान होना है। परिणाम आने के साथ यह स्पष्ट होगा कि पार्षदों का समर्थन किस उम्मीदवार के पक्ष में गया और किन निकायों में निर्दलीय पार्षदों ने बोर्ड गठन में भूमिका निभाई।
संवाददाता — श्रवण पंवार
जयपुर | NMS.NEWS
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