News Details | Navdhriti Manavadhikar Samachar
Home Category E-Book
Quick Menu
NMS NEWS JAIPUR

Reporter

Category: Weather (मौसम)    State: Delhi

2026-09-22 03:03:26

नई दिल्ली। देश में इस साल का मानसून कमजोर रहने के संकेत अब स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। 18 सितंबर तक जून से सितंबर के मानसून सीजन में देशभर में सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। बारिश की यह कमी बरकरार रहती है तो वर्ष 2009 के बाद यह सबसे कमजोर मानसून साबित हो सकता है।

अल नीनो का असर: 17 साल में सबसे सूखा मानसून, बारिश की कमी से खेती पर बढ़ा दबाव

नई दिल्ली। देश में इस साल का मानसून कमजोर रहने के संकेत अब स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। 18 सितंबर तक जून से सितंबर के मानसून सीजन में देशभर में सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। बारिश की यह कमी बरकरार रहती है तो वर्ष 2009 के बाद यह सबसे कमजोर मानसून साबित हो सकता है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अल नीनो की सक्रियता मानसूनी बारिश के कमजोर रहने के प्रमुख कारणों में शामिल है। सितंबर में भी कई क्षेत्रों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज हुई है, जिससे खरीफ फसलों की स्थिति पर चिंता बढ़ी है।

धान की बुवाई पर भी असर

कम बारिश का असर धान, दलहन, कपास और मक्का जैसी खरीफ फसलों पर दिखाई दे रहा है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 18 सितंबर तक खरीफ फसलों की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में करीब 15 लाख हेक्टेयर कम क्षेत्र में हुई है। धान का रकबा भी लगभग 3.73 प्रतिशत घटकर 426.81 लाख हेक्टेयर रह गया।

कई राज्यों में बारिश की बड़ी कमी

बारिश की कमी का असर अलग-अलग राज्यों में अलग स्तर पर देखा गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मेघालय, आंध्र प्रदेश, पंजाब, बिहार, कर्नाटक, केरल, असम और राजस्थान समेत कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश हुई है। वहीं कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश भी दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की कमी का असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहता। मिट्टी की नमी, जलाशयों का जलस्तर, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आने वाले रबी सीजन की बुवाई भी इससे प्रभावित हो सकती है।

जलाशयों में भी घटा पानी

केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के 178 प्रमुख जलाशयों में कुल क्षमता का करीब 70.66 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। कमजोर मानसून के कारण जल संसाधनों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है।

हालांकि देश के खाद्यान्न भंडार की स्थिति तत्काल बड़े खाद्य संकट की ओर संकेत नहीं करती। आगामी दिनों में बारिश का पैटर्न, मानसून की वापसी और फसलों की वास्तविक पैदावार स्थिति महत्वपूर्ण रहेगी।

संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
NMS.NEWS — नवधृति मानवाधिकार समाचार
सच. साहस. न्याय की खबर
Old Archives & News

Looking for our older reports or missed stories from the past?

View Old News