Category:
Business (व्यापार)
State:
Delhi
2026-09-28 05:34:39
जयपुर। देश में इस वर्ष कमजोर और असमान मानसून का असर अब कृषि क्षेत्र पर साफ दिखाई देने लगा है। सितंबर के अंतिम चरण में पहुंच चुके मानसून सीजन के दौरान देशभर में सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्षा की कमी वाले क्षेत्रों का हिस्सा भी बढ़कर करीब 51 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
कम बारिश ने बढ़ाई कृषि की चिंता, देश के 51% हिस्से में वर्षा की कमी; महंगाई और ग्रामीण मांग पर असर की आशंका
जयपुर। देश में इस वर्ष कमजोर और असमान मानसून का असर अब कृषि क्षेत्र पर साफ दिखाई देने लगा है। सितंबर के अंतिम चरण में पहुंच चुके मानसून सीजन के दौरान देशभर में सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्षा की कमी वाले क्षेत्रों का हिस्सा भी बढ़कर करीब 51 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
कम बारिश का सीधा असर खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन संभावनाओं पर पड़ रहा है। विशेष रूप से धान की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में कम रही है। 18 सितंबर तक देश में खरीफ फसलों की कुल बुवाई पिछले साल के मुकाबले करीब 15.05 लाख हेक्टेयर कम दर्ज की गई, जबकि धान का क्षेत्र भी लगभग 16.64 लाख हेक्टेयर घटा है।
राजस्थान समेत कई राज्यों में बारिश की कमी
मानसून की कमी का असर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार राजस्थान में भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की कमी और अधिक रही है, जबकि कई कृषि-प्रधान राज्यों में कम वर्षा के कारण फसल की लागत, पैदावार और किसानों की आय को लेकर चिंता बढ़ी है।
ग्रामीण मांग पर भी पड़ सकता है असर
कम बारिश के कारण किसानों द्वारा बीज, खाद और कीटनाशकों जैसे कृषि इनपुट पर खर्च में कमी आने के संकेत मिले हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मांग प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है। रॉयटर्स की 23 सितंबर की रिपोर्ट में भी कमजोर मानसून के कारण कृषि-इनपुट खर्च में कमी का उल्लेख किया गया है।
धान उत्पादन को लेकर भी बाजार में चिंता बनी हुई है। कुछ उद्योग विशेषज्ञों ने 2026-27 में भारत के चावल उत्पादन में बड़ी गिरावट की संभावना जताई है, हालांकि यह अभी अनुमान है, अंतिम सरकारी उत्पादन आंकड़ा नहीं।
मानसून की विदाई शुरू
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 19 सितंबर 2026 को पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से वापसी शुरू कर दी थी, जिससे जिन इलाकों में बारिश की कमी रही है वहां उसकी भरपाई की गुंजाइश सीमित होती जा रही है।
ऐसे में आने वाले दिनों में कृषि उत्पादन, खाद्य कीमतों, ग्रामीण आय और बाजार की धारणा पर मौसम की स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। फिलहाल कम बारिश का प्रभाव सभी राज्यों और सभी फसलों पर एक जैसा नहीं है, इसलिए अंतिम तस्वीर फसलवार उत्पादन और सरकारी आंकड़े आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
संवाददाता श्रवण पंवार
जयपुर | NMS.NEWS