Category:
Court (न्यायालय)
State:
Rajasthan
2026-09-30 03:06:38
जोधपुर। राजस्थान में संचालित करीब तीन हजार मदरसों के संचालन, निगरानी और शिक्षा व्यवस्था को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत ने मदरसों के प्रभावी प्रबंधन, नियंत्रण और संचालन के लिए सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों की जानकारी शपथ पत्र के माध्यम से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
राजस्थान के करीब 3 हजार मदरसों पर हाईकोर्ट की नजर, सरकार से मांगा विस्तृत लेखा-जोखा
जोधपुर। राजस्थान में संचालित करीब तीन हजार मदरसों के संचालन, निगरानी और शिक्षा व्यवस्था को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत ने मदरसों के प्रभावी प्रबंधन, नियंत्रण और संचालन के लिए सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों की जानकारी शपथ पत्र के माध्यम से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
मामले की सुनवाई न्यायाधीश विनीत कुमार माथुर और न्यायाधीश चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ के समक्ष हुई। अदालत ने राज्य में मदरसों की वर्तमान व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सरकार से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को प्रस्तावित है।
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता मोतीसिंह राजपुरोहित ने मदरसा व्यवस्था में सुधार को लेकर कई सुझाव अदालत के समक्ष रखे। इनमें आरबीएसई-सीबीएसई से संबद्ध मदरसों की रिपोर्ट तैयार करना, पंजीयन की समीक्षा, प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर के लिए शिक्षा विभाग से पाठ्यक्रम तैयार करवाना तथा समान परीक्षा व्यवस्था लागू करने जैसे सुझाव शामिल हैं।
अदालत के समक्ष यह सुझाव भी रखा गया कि मदरसा बोर्ड के पोर्टल पर विद्यार्थियों का पूरा विवरण दर्ज किया जाए और आधार से जुड़ी विशिष्ट पहचान के माध्यम से विद्यार्थियों का सत्यापन सुनिश्चित किया जाए। शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता निर्धारित करने तथा निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करने वाले शिक्षकों को वेतन या मानदेय नहीं दिए जाने का सुझाव भी रखा गया।
खंडपीठ ने सरकार को शपथ पत्र तैयार करते समय इन सुझावों पर भी विचार करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह स्पष्ट करने को कहा है कि प्रदेश में संचालित मदरसों की व्यवस्था, निगरानी और शैक्षणिक संचालन को लेकर सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
मामले की अगली सुनवाई अक्टूबर में होने वाली है। ऐसे में राज्य के करीब तीन हजार मदरसों की प्रशासनिक एवं शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर सरकार के जवाब पर नजर रहेगी। फिलहाल हाईकोर्ट की ओर से इस मामले में कोई अंतिम आदेश नहीं दिया गया है।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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