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Category: Politics (राजनीति)    State: Rajasthan

2026-09-30 03:20:12

जयपुर। राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के बाद अब राजनीतिक दलों का फोकस पंचायती राज चुनाव पर केंद्रित हो गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी तैयारियां तेज होने के साथ भाजपा और कांग्रेस दोनों ने संगठन को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। निकाय चुनाव के अनुभव के आधार पर दोनों दल अब स्थानीय स्तर की कमियों, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और संभावित उम्मीदवारों के समीकरणों पर मंथन कर रहे हैं।

निकाय चुनाव के बाद पंचायत की बारी, भाजपा-कांग्रेस ने बदली रणनीति

जयपुर। राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के बाद अब राजनीतिक दलों का फोकस पंचायती राज चुनाव पर केंद्रित हो गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी तैयारियां तेज होने के साथ भाजपा और कांग्रेस दोनों ने संगठन को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। निकाय चुनाव के अनुभव के आधार पर दोनों दल अब स्थानीय स्तर की कमियों, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और संभावित उम्मीदवारों के समीकरणों पर मंथन कर रहे हैं।

भाजपा की ओर से पंचायत चुनाव को लेकर बूथ और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हाल के कार्यकर्ता संवाद कार्यक्रमों में पंचायत चुनाव की तैयारियों में जुटने और गांव-गांव तक संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया है। वहीं, कांग्रेस भी संगठनात्मक बैठकों और स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

आरक्षण के बाद बदले स्थानीय समीकरण

पंचायत चुनाव में आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संभावित उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के स्थानीय समीकरणों में बदलाव आया है। आरक्षित सीटों की स्थिति स्पष्ट होने के साथ अब दावेदार अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हो रहे हैं। चुनाव में स्थानीय मुद्दे, विकास कार्य, उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ और संगठन की सक्रियता महत्वपूर्ण विषय रहेंगे।

15 नवंबर तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की समयसीमा

राजस्थान पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष समयसीमा प्रस्तुत की थी। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार पंचायत चुनाव की प्रक्रिया सितंबर से शुरू होकर 15 नवंबर 2026 तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव चरणबद्ध तरीके से कराए जाने हैं, जिसके बाद प्रमुख, प्रधान और अन्य पदों की चुनाव प्रक्रिया पूरी होगी।

निकाय चुनाव के बाद अब पंचायत चुनाव ग्रामीण राजनीति के लिए अगला बड़ा चरण बन गया है। दोनों प्रमुख दलों के सामने संगठन को एकजुट रखने, स्थानीय स्तर पर बेहतर तालमेल बनाने और उम्मीदवार चयन में क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखने की चुनौती रहेगी। आने वाले दिनों में गांवों से लेकर जिला स्तर तक राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

संवाददाता श्रवण पंवार, जयपुर
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