Category:
Sports (खेल)
State:
Delhi
2026-09-30 03:22:12
जयपुर। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय निशानेबाज नीरू ढांडा ने मुश्किल हालात के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला ट्रैप स्पर्धा में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। हरियाणा के जींद की 26 वर्षीय नीरू ने फाइनल में 28 अंक हासिल किए और पिछले एशियाई रिकॉर्ड 24 अंक को पीछे छोड़ दिया। वह एशियन गेम्स में महिला ट्रैप के व्यक्तिगत वर्ग में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला निशानेबाज बन गई हैं।
जज्बे की मिसाल बनीं नीरू ढांडा, बीमारी से उबरकर एशियन गेम्स में रचा इतिहास
जयपुर। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय निशानेबाज नीरू ढांडा ने मुश्किल हालात के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला ट्रैप स्पर्धा में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। हरियाणा के जींद की 26 वर्षीय नीरू ने फाइनल में 28 अंक हासिल किए और पिछले एशियाई रिकॉर्ड 24 अंक को पीछे छोड़ दिया। वह एशियन गेम्स में महिला ट्रैप के व्यक्तिगत वर्ग में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला निशानेबाज बन गई हैं।
नीरू की इस सफलता की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि प्रतियोगिता से कुछ दिन पहले उनकी तबीयत बेहद खराब हो गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक वह अस्पताल में भर्ती रहीं और करीब साढ़े तीन सप्ताह तक नियमित ट्रेनिंग नहीं कर पाईं। कुछ दिनों तक उन्होंने भोजन तक नहीं किया और केवल पानी के सहारे रहीं। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और एशियन गेम्स के मैदान पर उतरकर शानदार प्रदर्शन किया।
एक ही दिन में रजत और फिर स्वर्ण
नीरू ने पहले महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में आशिमा अहलावत और मनीषा कीर के साथ भारत को रजत पदक दिलाया। भारतीय टीम ने 328 अंक हासिल किए, जबकि चीन ने 346 अंकों के साथ स्वर्ण जीता। इसके बाद व्यक्तिगत फाइनल में नीरू ने अपने प्रदर्शन को और ऊंचाई दी और स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
नीरू की यह उपलब्धि भारतीय ट्रैप शूटिंग के इतिहास में महत्वपूर्ण पड़ाव है। इससे पहले एशियन गेम्स में भारत के लिए व्यक्तिगत ट्रैप स्वर्ण 1978 में पुरुष वर्ग में रणधीर सिंह ने जीता था। नीरू ने करीब 48 साल बाद इस स्पर्धा में भारत के लिए व्यक्तिगत स्वर्ण का सिलसिला फिर शुरू किया।
नीरू ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार, कोच, टीम और सहयोगी स्टाफ को दिया है। उनके भाई लक्ष्य श्योरण की उपलब्धियों से भी उन्हें निशानेबाजी में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। बीमारी, सीमित ट्रेनिंग और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनका एशियन गेम्स में स्वर्ण तक पहुंचना भारतीय खेल जगत में संघर्ष और दृढ़ संकल्प की कहानी बनकर सामने आया है।
संवाददाता श्रवण पंवार, जयपुर
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