Category:
Court (न्यायालय)
State:
Rajasthan
2026-10-02 03:00:35
नई दिल्ली/जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट से जुड़े विवाद में पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति संदीप मेहता की ओर से लगाए गए आरोपों पर पहली बार विस्तार से अपना पक्ष रखा है। शर्मा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके पीछे व्यक्तिगत या पेशेवर कारण हो सकते हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश को हाईकोर्ट के प्रशासनिक कामकाज में हस्तक्षेप का अधिकार किस आधार पर है।
राजस्थान हाईकोर्ट विवाद: पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने जस्टिस संदीप मेहता के आरोपों पर दिया जवाब
नई दिल्ली/जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट से जुड़े विवाद में पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति संदीप मेहता की ओर से लगाए गए आरोपों पर पहली बार विस्तार से अपना पक्ष रखा है। शर्मा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके पीछे व्यक्तिगत या पेशेवर कारण हो सकते हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश को हाईकोर्ट के प्रशासनिक कामकाज में हस्तक्षेप का अधिकार किस आधार पर है।
दरअसल, अगस्त 2026 में न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को भेजे पत्रों में राजस्थान हाईकोर्ट के तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के प्रशासनिक कामकाज, केस लिस्टिंग, रोस्टर और कुछ न्यायिक मामलों से जुड़े फैसलों को लेकर सवाल उठाए थे। पत्रों में कथित पक्षपात, प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग और अन्य गंभीर आरोपों का उल्लेख किया गया था।
जस्टिस शर्मा ने अपने जवाब में इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि हाईकोर्ट में रोस्टर निर्धारित करना मुख्य न्यायाधीश के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र का हिस्सा है। उन्होंने तबादलों को लेकर भी सफाई दी और कहा कि न्यायिक अधिकारियों के स्थानांतरण कई प्रशासनिक मानकों के आधार पर किए जाते हैं। उन्होंने लगभग 800 तबादलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन्हें किसी एक मामले के फैसले से जोड़ना उचित नहीं है।
शर्मा ने अपने न्यायिक कार्यकाल का उल्लेख करते हुए दावा किया कि करीब साढ़े नौ वर्ष के दौरान उन्होंने 88 हजार से अधिक मामलों का निस्तारण किया। उन्होंने यह भी कहा कि जिन मामलों के फैसलों की सुप्रीम कोर्ट में जांच हुई, उनमें कई फैसले बरकरार रहे।
मामले में दोनों पक्षों के आरोप और जवाब सार्वजनिक होने के बाद न्यायपालिका के प्रशासनिक अधिकारों, संस्थागत मर्यादा और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस पूरे विवाद पर संबंधित संस्थागत प्रक्रिया के तहत विचार किया गया है और दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग संदर्भ में देखा जा रहा है।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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