Category:
Business (व्यापार)
State:
Maharashtra
2026-10-02 03:29:33
नई दिल्ली। भारतीय प्राथमिक बाजार में वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही के दौरान आईपीओ गतिविधियां तेज होने की संभावना है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 145 कंपनियों को सेबी की मंजूरी मिल चुकी है और इन कंपनियों के संभावित सार्वजनिक निर्गम का कुल आकार लगभग ₹2.75 लाख करोड़ आंका गया है। हालांकि, मंजूरी मिलना यह सुनिश्चित नहीं करता कि सभी कंपनियां इसी अवधि में आईपीओ लेकर बाजार में उतरेंगी।
📈 आईपीओ बाजार में बड़ी हलचल, 145 कंपनियां जुटा सकती हैं करीब ₹2.75 लाख करोड़
नई दिल्ली। भारतीय प्राथमिक बाजार में वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही के दौरान आईपीओ गतिविधियां तेज होने की संभावना है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 145 कंपनियों को सेबी की मंजूरी मिल चुकी है और इन कंपनियों के संभावित सार्वजनिक निर्गम का कुल आकार लगभग ₹2.75 लाख करोड़ आंका गया है। हालांकि, मंजूरी मिलना यह सुनिश्चित नहीं करता कि सभी कंपनियां इसी अवधि में आईपीओ लेकर बाजार में उतरेंगी।
बड़े इश्यू पर बाजार की नजर
आईपीओ पाइपलाइन में कई बड़े नाम शामिल हैं। उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रस्तावित इश्यू का आकार करीब ₹35,000 करोड़, अवाडा इलेक्ट्रो का ₹7,600 करोड़, ओयो (ओरावेल स्टेज) का करीब ₹6,650 करोड़ और जेप्टो का लगभग ₹5,106 करोड़ बताया गया है। इसके अलावा क्रेडिला फाइनेंशियल सर्विसेज और डॉर्फ-कैटल केमिकल्स इंडिया के भी बड़े इश्यू प्रस्तावित हैं।
पहली छमाही के बाद बढ़ी आईपीओ गतिविधि
वित्त वर्ष की शुरुआत में आईपीओ बाजार की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही, लेकिन अगस्त और सितंबर में गतिविधियां तेज हुईं। एक अन्य हालिया रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान मुख्य बोर्ड आईपीओ के जरिए कंपनियों ने करीब ₹94,205 करोड़ जुटाए। इसी अवधि में 78 कंपनियां मुख्य बोर्ड पर आईं।
सभी कंपनियों के बाजार में आने पर नजर
विशेषज्ञों के अनुसार स्वीकृत पूरी पाइपलाइन का एक हिस्सा ही वास्तविक रूप से बाजार में आ सकता है। इसलिए आगामी छह महीनों में कंपनियों की बाजार परिस्थितियों, मूल्यांकन और निवेशक मांग के आधार पर आईपीओ लॉन्च करने की रणनीति महत्वपूर्ण रहेगी। सेबी की सार्वजनिक फाइलिंग में भी सितंबर-अक्टूबर 2026 के दौरान कई कंपनियों के प्रॉस्पेक्टस दर्ज हुए हैं।
निवेशकों के लिए जरूरी: किसी भी आईपीओ में आवेदन करने से पहले कंपनी का ड्राफ्ट/रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस, वित्तीय स्थिति, मूल्यांकन, जोखिम और इश्यू से प्राप्त धन के उपयोग की जानकारी जरूर जांचें। आईपीओ की मंजूरी या बड़ी पाइपलाइन अपने आप में निवेश रिटर्न की गारंटी नहीं है।
संवाददाता श्रवण पंवार
जयपुर | NMS.NEWS