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Category: Health (स्वास्थ्य)    State: Rajasthan

2026-10-12 05:02:03

रिसर्च में खुलासा: महिलाओं की जीवन प्रत्याशा करीब 19 साल, लेकिन अच्छे जीवन के सिर्फ 5.7 साल; पुरुषों के हिस्से में 8.2 साल**

# महिलाएं पुरुषों से ज्यादा जीती हैं, लेकिन स्वस्थ और खुशहाल जीवन के साल कम; 60 की उम्र के बाद सामने आई बड़ी असमानता

**रिसर्च में खुलासा: महिलाओं की जीवन प्रत्याशा करीब 19 साल, लेकिन अच्छे जीवन के सिर्फ 5.7 साल; पुरुषों के हिस्से में 8.2 साल**

**जयपुर | संवाददाता श्रवण पंवार | NMS.NEWS**

भारत में महिलाएं औसतन पुरुषों की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहती हैं, लेकिन लंबी उम्र का मतलब यह नहीं कि उन्हें उतने ही साल स्वस्थ, आर्थिक रूप से सुरक्षित और संतुष्ट जीवन भी मिले। हालिया शोध में सामने आया है कि 60 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अच्छे जीवन के कम साल मिलते हैं। यह अंतर खासतौर पर ग्रामीण महिलाओं के मामले में अधिक दिखाई देता है।

*डाउन टू अर्थ* की 30 सितंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, 60 वर्ष की उम्र तक पहुंचने वाली भारतीय महिलाओं के औसतन 19 वर्ष और पुरुषों के करीब 17.5 वर्ष और जीवित रहने का अनुमान है। लेकिन इनमें से महिलाओं के केवल 5.7 वर्ष और पुरुषों के 8.2 वर्ष को शोध में ‘अच्छे जीवन’ की श्रेणी में रखा गया है। <Cite refs={["turn554950search1","turn554950search8"]}/>

### लंबी उम्र के बावजूद महिलाओं को कम मिल रहे अच्छे साल

शोध में ‘अच्छे जीवन’ का आकलन केवल उम्र के आधार पर नहीं किया गया। इसमें चार प्रमुख पहलुओं को शामिल किया गया—गरीबी से मुक्ति, रोजमर्रा के काम करने की शारीरिक क्षमता, मानसिक एवं संज्ञानात्मक स्वास्थ्य और जीवन से संतुष्टि।

अर्थात, कोई व्यक्ति लंबे समय तक जीवित तो रह सकता है, लेकिन यदि वह आर्थिक परेशानी, शारीरिक निर्भरता या मानसिक स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों से जूझ रहा है, तो उसके जीवन के सभी वर्ष बेहतर जीवन की श्रेणी में नहीं गिने जाएंगे।

### ग्रामीण महिलाओं की स्थिति अधिक चिंताजनक

शोध के आंकड़ों के अनुसार, 60 वर्ष की उम्र के बाद ग्रामीण महिलाओं को औसतन केवल 4.6 वर्ष अच्छे जीवन के मिलते हैं। इसके मुकाबले शहरी पुरुषों के लिए यह अवधि 10.2 वर्ष बताई गई है। यह अंतर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं, आर्थिक सुरक्षा और बुजुर्गों की देखभाल से जुड़ी चुनौतियों पर ध्यान देने की जरूरत को रेखांकित करता है। <Cite refs={["turn554950search0","turn554950search1"]}/>

### राज्यों के बीच भी दिखाई दिया अंतर

अध्ययन में विभिन्न राज्यों और सामाजिक परिस्थितियों के आधार पर जीवन की गुणवत्ता में अंतर का विश्लेषण किया गया। इससे संकेत मिलता है कि बुजुर्गों की जरूरतें हर क्षेत्र में एक जैसी नहीं हैं। कहीं शारीरिक स्वास्थ्य प्रमुख चुनौती है, तो कहीं मानसिक और संज्ञानात्मक स्वास्थ्य जीवन की गुणवत्ता को अधिक प्रभावित करता है।

### नीति और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण संकेत

विशेषज्ञों के लिए इस तरह के आंकड़े इसलिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि केवल औसत आयु बढ़ना पर्याप्त नहीं है। बुजुर्गों को बेहतर जीवन देने के लिए सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं, नियमित जांच, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, आर्थिक सुरक्षा और परिवार व समाज का सहयोग भी जरूरी है। महिलाओं के लिए विशेष रूप से ऐसी योजनाओं की आवश्यकता है, जो उन्हें उम्र बढ़ने के साथ स्वस्थ और आत्मनिर्भर बनाए रखने में मदद करें।

**NMS.NEWS की रिपोर्ट:** शोध का मुख्य संदेश स्पष्ट है—लंबी उम्र के साथ स्वस्थ, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना भी जरूरी है। महिलाओं और ग्रामीण बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था इस अंतर को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

**संवाददाता: श्रवण पंवार, जयपुर**
**Navdhriti Manavadhikar Samachar | NMS.NEWS**
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