Category:
Environment (पर्यावरण)
State:
Rajasthan
2026-07-29 02:27:21
टाइगर रिजर्व में बसते सैकड़ों गांव, बढ़ रहा मानव–बाघ संघर्ष; पुनर्वास की रफ्तार बनी बड़ी चुनौती
टाइगर रिजर्व में बसते सैकड़ों गांव, बढ़ रहा मानव–बाघ संघर्ष; पुनर्वास की रफ्तार बनी बड़ी चुनौती
राजस्थान के टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में आज भी हजारों परिवार जंगलों के बीच जीवन जीने को मजबूर, वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीणों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की चुनौती बरकरार।
जयपुर | संवाददाता: श्रवण पंवार | NMS.NEWS
राजस्थान के विभिन्न टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण के साथ मानव–बाघ संघर्ष एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। संरक्षण प्रयासों के बावजूद सैकड़ों गांव अब भी टाइगर रिजर्व की सीमा के भीतर स्थित हैं, जहां हजारों परिवार बाघों और अन्य वन्यजीवों के साथ जोखिम भरा जीवन जी रहे हैं। बाघों की संख्या बढ़ने के साथ ग्रामीणों की सुरक्षा, आजीविका और पुनर्वास का मुद्दा भी लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
वन विभाग द्वारा चरणबद्ध तरीके से गांवों के पुनर्वास की प्रक्रिया जारी है, लेकिन कई स्थानों पर भूमि, मुआवजा, आधारभूत सुविधाओं और स्थानीय सहमति जैसी चुनौतियों के कारण यह कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित पुनर्वास के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल और रोजगार जैसी सुविधाओं का विकास भी समान रूप से आवश्यक है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों पर बढ़ते मानवीय दबाव को कम करना और ग्रामीणों को सुरक्षित विकल्प उपलब्ध कराना ही मानव–वन्यजीव संघर्ष का स्थायी समाधान हो सकता है। इससे न केवल बाघों के प्राकृतिक आवास सुरक्षित रहेंगे, बल्कि ग्रामीण परिवारों का जीवन भी अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक बनेगा।
NMS.NEWS का मानना है कि वन्यजीव संरक्षण और मानव हित एक-दूसरे के पूरक हैं। योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शी पुनर्वास और स्थानीय समुदाय की सहभागिता से ही प्रकृति संरक्षण और ग्रामीण विकास के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकता है।
— संवाददाता: श्रवण पंवार, जयपुर | NMS.NEWS