Category:
Politics (राजनीति)
State:
Rajasthan
2026-09-16 05:58:23
कम बहुमत वाले निकायों पर वरिष्ठ नेताओं की नजर, संगठन स्तर पर शुरू हुआ फीडबैक और रणनीति तैयार करने का दौर
निकाय चुनाव के बाद भाजपा में बोर्ड गठन की कवायद तेज, स्थानीय नेताओं को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी
कम बहुमत वाले निकायों पर वरिष्ठ नेताओं की नजर, संगठन स्तर पर शुरू हुआ फीडबैक और रणनीति तैयार करने का दौर
जयपुर। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनावों के परिणाम सामने आने के बाद अब राजनीतिक दलों का फोकस नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं में बोर्ड गठन पर है। भाजपा ने जिन निकायों में स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहां स्थानीय समीकरणों और निर्वाचित पार्षदों की स्थिति को देखते हुए रणनीति तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। हालिया चुनाव में भाजपा 4,166 वार्डों में जीत के साथ सबसे अधिक वार्ड जीतने वाली पार्टी रही, जबकि कांग्रेस ने 3,595 वार्ड जीते। भाजपा के पास 85 निकायों में बहुमत और 60 अन्य निकायों में सबसे बड़ा दल होने की स्थिति बताई गई है।
स्थानीय नेताओं को सौंपी जा सकती है बोर्ड बनाने की जिम्मेदारी
पार्टी के अंदरूनी संगठनात्मक स्तर पर चर्चा का मुख्य केंद्र ऐसे निकाय हैं, जहां बोर्ड बनाने के लिए कुछ अतिरिक्त पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता है। ऐसे स्थानों पर स्थानीय नेताओं, जिलाध्यक्षों, विधायकों और निकाय क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
निर्दलीय पार्षद भी कई निकायों में समीकरण प्रभावित कर रहे हैं। चुनाव परिणामों में निर्दलीयों की उल्लेखनीय संख्या सामने आने के कारण बोर्ड गठन से पहले स्थानीय स्तर पर समर्थन जुटाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण बन गई है।
प्रदेश संगठन मांगेगा स्थानीय रिपोर्ट
निकाय चुनाव के परिणामों के बाद पार्टी स्तर पर प्रत्येक निकाय की स्थिति का आकलन किया जा रहा है। इसमें निर्वाचित पार्षदों की संख्या, बहुमत का गणित, स्थानीय राजनीतिक समीकरण और बोर्ड गठन की संभावनाओं को आधार बनाया जा सकता है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार भाजपा संगठन की ओर से स्थानीय नेताओं और पदाधिकारियों से फीडबैक लेने तथा कम अंतर वाले निकायों पर विशेष रणनीति बनाने की तैयारी है। इसे आगामी महापौर, सभापति और अध्यक्ष पद के चुनावों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
21 सितंबर को शुरू होगा अध्यक्ष पद का अगला चरण
राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में पार्षदों के परिणाम के बाद अब महापौर, सभापति और अध्यक्ष पदों के चुनाव की प्रक्रिया महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर रही है। उपलब्ध चुनाव कार्यक्रम के अनुसार इन पदों के लिए 21 सितंबर 2026 को मतदान होना है, जबकि उपमहापौर/उपाध्यक्ष पद के चुनाव 22 सितंबर को प्रस्तावित हैं।
ऐसे में आने वाले दिनों में विभिन्न निकायों में पार्षदों के समर्थन और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को लेकर गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए कम बहुमत वाले निकायों में बोर्ड गठन का गणित महत्वपूर्ण रहेगा।
संवाददाता — श्रवण पंवार
जयपुर | NMS.NEWS
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