Category:
Social Issues (सामाजिक मुद्दे)
State:
Rajasthan
2026-06-19 03:06:05
राजस्थान में बाल विवाह पर लगाम, लेकिन किशोर मातृत्व बना गंभीर चुनौती
राजस्थान में बाल विवाह पर लगाम, लेकिन किशोर मातृत्व बना गंभीर चुनौती
बाल विवाह में आई कमी, फिर भी कम उम्र में मातृत्व के मामले चिंता का विषय
जयपुर | NMS NEWS
राजस्थान में बाल विवाह की कुप्रथा पर रोक लगाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में चलाए गए जागरूकता अभियानों और सरकारी प्रयासों का सकारात्मक असर देखने को मिला है। राज्य में बाल विवाह के मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है, लेकिन दूसरी ओर किशोरावस्था में मातृत्व के बढ़ते मामलों ने नई चिंता खड़ी कर दी है।
हालिया सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों के अनुसार, 18 वर्ष से कम आयु में विवाह करने वाली बालिकाओं की संख्या में कमी आई है। शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता, विद्यालयों में नामांकन वृद्धि, सरकारी योजनाओं का लाभ और महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों ने इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अभी भी कई ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में कम उम्र में विवाह और जल्दी मातृत्व की परंपरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। किशोरावस्था में गर्भधारण से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इससे शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विकास के अवसर भी प्रभावित होते हैं।
स्वास्थ्य विभाग और सामाजिक संगठनों का मानना है कि बाल विवाह रोकने के साथ-साथ किशोरियों को स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा संबंधी सही जानकारी उपलब्ध कराना आवश्यक है। जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता से ही इस चुनौती का स्थायी समाधान संभव है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बालिकाओं को उच्च शिक्षा, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता के अवसर मिलते रहें तो राजस्थान आने वाले वर्षों में बाल विवाह और किशोर मातृत्व दोनों समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण हासिल कर सकता है।
राज्य सरकार, सामाजिक संस्थाओं और स्थानीय समुदायों के संयुक्त प्रयासों से सामाजिक बदलाव की यह यात्रा आगे बढ़ रही है, लेकिन लक्ष्य की पूर्ण प्राप्ति के लिए अभी और प्रयासों की आवश्यकता बनी हुई है।
संवाददाता: श्रवण पंवार
जयपुर | NMS.NEWS
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