Category:
Elections (चुनाव)
State:
Rajasthan
2026-09-07 08:53:59
जयपुर निकाय चुनाव में बढ़ा मुकाबले का रोमांच, 2.62 लाख नए वोटर बदल सकते हैं जीत-हार का समीकरण
जयपुर निकाय चुनाव में बढ़ा मुकाबले का रोमांच, 2.62 लाख नए वोटर बदल सकते हैं जीत-हार का समीकरण
जयपुर। जयपुर में परिसीमन के बाद नगर निकाय चुनाव का चुनावी गणित पूरी तरह बदल गया है। वार्डों की संख्या 250 से घटकर 150 हो गई है, लेकिन मतदाताओं की संख्या में करीब 2 लाख 62 हजार 546 की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में इस बार उम्मीदवारों के सामने बड़े क्षेत्र और अधिक मतदाताओं तक पहुंच बनाने की चुनौती होगी।
परिसीमन के बाद 28 वार्डों में 20 हजार से अधिक मतदाता हैं। इनमें वार्ड 26 सबसे बड़ा है, जहां करीब 30,572 मतदाता दर्ज हैं। वहीं सबसे छोटे वार्ड में मतदाताओं की संख्या करीब 4,838 है। कई वार्डों में मतदाताओं की संख्या 25 हजार से अधिक होने के कारण चुनाव प्रचार, बूथ प्रबंधन और मतदाता संपर्क की भूमिका पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।
छोटा वोट स्विंग भी बदल सकता है परिणाम
पिछले नगर निकाय चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो बड़ी संख्या में सीटों पर जीत-हार का अंतर काफी कम रहा था। ऐसे में इस बार किसी वार्ड में एक-दो प्रतिशत वोट का मामूली बदलाव भी परिणाम को प्रभावित कर सकता है। खासकर उन वार्डों में मुकाबला अधिक रोचक रहने की संभावना है, जहां दो से अधिक प्रत्याशी मजबूत स्थिति में हैं।
बड़े वार्डों में बूथ मैनेजमेंट बनेगा निर्णायक
राजनीतिक जानकारों के अनुसार बड़े वार्डों में केवल प्रचार और जनसंपर्क पर्याप्त नहीं होगा। प्रत्याशियों को बूथ स्तर पर मतदाताओं से संपर्क, स्थानीय मुद्दों की पहचान और संगठनात्मक प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना पड़ेगा। प्रत्येक बूथ से कुछ अतिरिक्त वोट हासिल करना भी अंतिम परिणाम में महत्वपूर्ण अंतर पैदा कर सकता है।
पुराने परिणामों से भी मिलेगी राजनीतिक तस्वीर
2020 के नगर निकाय चुनाव में जयपुर के 250 वार्डों में भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशियों के बीच मुकाबला हुआ था। परिसीमन के बाद वार्डों की संरचना बदलने से पुराने चुनावी समीकरण भी काफी हद तक प्रभावित हुए हैं। अब नए वार्डों में स्थानीय समीकरण, प्रत्याशी की पकड़ और मतदाता समूहों का रुझान निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
कुल मिलाकर जयपुर निकाय चुनाव में बढ़ा मतदाता आधार और बदली वार्ड सीमाएं राजनीतिक दलों के लिए नई चुनौती लेकर आई हैं। जहां बड़े वार्डों में बूथ मैनेजमेंट महत्वपूर्ण होगा, वहीं करीबी मुकाबले वाले वार्डों में कुछ सौ वोट भी जीत और हार के बीच का अंतर तय कर सकते हैं।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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