Category:
Elections (चुनाव)
State:
Rajasthan
2026-09-07 08:57:25
राजस्थान निकाय चुनाव: प्रत्याशियों की बढ़ी धड़कनें, मतदान से पहले बाड़ाबंदी का दौर तेज
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राजस्थान निकाय चुनाव: प्रत्याशियों की बढ़ी धड़कनें, मतदान से पहले बाड़ाबंदी का दौर तेज
जयपुर। राजस्थान में नगर निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां अब निर्णायक दौर में पहुंच गई हैं। मतदान की तारीख नजदीक आते ही भाजपा, कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने प्रत्याशियों और संभावित विजेताओं को लेकर रणनीति तेज कर दी है। कई स्थानों पर मतदान के बाद संभावित परिणामों को ध्यान में रखते हुए प्रत्याशियों की बाड़ाबंदी की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं।
राज्य में निकाय चुनाव दो चरणों में आयोजित किए जा रहे हैं। पहले चरण में 9 सितंबर को 162 निकायों में मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण में 11 सितंबर को 147 निकायों में वोट डाले जाएंगे। चुनाव कार्यक्रम में कुल 309 नगरीय निकायों के 10,245 वार्ड शामिल हैं।
मतदान से पहले प्रत्याशियों पर नजर, परिणाम के बाद बढ़ेगी हलचल
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशियों की संख्या को लेकर भी मुकाबला काफी रोचक बना हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 10,245 वार्डों के लिए 60 हजार से अधिक नामांकन दाखिल हुए थे।
राजनीतिक दलों को आशंका है कि मतदान के बाद पार्षदों के रुख में बदलाव या क्रॉस वोटिंग की स्थिति बन सकती है। इसी कारण कई निकायों में विजयी प्रत्याशियों को सुरक्षित रखने और राजनीतिक समीकरण अपने पक्ष में बनाए रखने के लिए बाड़ाबंदी की रणनीति अपनाई जा रही है।
होटल-रिसॉर्ट में रखे जा सकते हैं प्रत्याशी
चुनाव परिणाम के बाद अध्यक्ष, सभापति और महापौर पद के चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की सक्रियता और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में प्रत्याशियों को होटल, रिसॉर्ट या सुरक्षित स्थानों पर रखने की रणनीति सामने आ रही है। महिला प्रत्याशियों के साथ उनके परिवार के सीमित सदस्यों को रखने की व्यवस्था किए जाने की भी चर्चा है।
राजनीतिक दलों की निगरानी व्यवस्था मजबूत
भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने प्रत्याशियों से लगातार संपर्क बनाए रखने के लिए स्थानीय स्तर पर नेताओं और संगठन पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दी है। प्रत्याशियों की गतिविधियों, मतदान के बाद उनके संपर्क और संभावित राजनीतिक समीकरणों पर भी नजर रखी जा रही है।
निकाय चुनाव में पार्षदों के चुनाव के बाद संबंधित निकायों में महापौर, सभापति और नगरपालिका अध्यक्ष के चुनाव होंगे।
14 सितंबर को मतगणना, इसके बाद अध्यक्ष पद की तस्वीर साफ
दोनों चरणों में मतदान के बाद 14 सितंबर को मतगणना प्रस्तावित है। इसके बाद निकाय प्रमुखों के चुनाव के साथ स्थानीय राजनीति में असली शक्ति परीक्षण शुरू होगा। यही वजह है कि मतदान से पहले ही राजनीतिक दल संभावित विजेताओं को अपने खेमे में सुरक्षित रखने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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