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Vimal kumar jain

Reporter

Category: Cyber Security (साइबर सुरक्षा)    State: Rajasthan

2026-06-22 16:01:36

मानवाधिकार संगठन के अध्यक्ष विमल जैन ने कथित फर्जी लोन ऐप्स पर उठाए गंभीर सवाल, हाईकोर्ट में PIL दायर करने की तैयारी

मानवाधिकार संगठन के अध्यक्ष, नेशनल एंटी करप्शन फाउंडेशन के नेशनल चीफ डायरेक्टर तथा मानव सेवा मिशन से जुड़े विमल जैन ने दावा किया है कि उनकी टीम द्वारा की जा रही जांच में कई डिजिटल लोन ऐप्स की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं।

विमल जैन के अनुसार, ये कथित लोन ऐप्स लोगों को कम समय के लिए ऋण उपलब्ध कराते हैं, लेकिन कुछ मामलों में मात्र 6 दिनों के भीतर मूल राशि से कई गुना अधिक रकम वसूलने का दबाव बनाते हैं। उनका आरोप है कि इन ऐप्स से जुड़े रिकवरी एजेंट लोगों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने, धमकाने और ब्लैकमेल करने जैसी गतिविधियों में भी शामिल हो सकते हैं।

जैन का कहना है कि उनकी जांच के दौरान कई पीड़ितों ने शिकायत की कि उनके निजी फोटो का दुरुपयोग कर कथित रूप से अश्लील या न्यूड तस्वीरें बनाई गईं और फिर उन्हें वायरल करने की धमकी देकर पैसे वसूले गए। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं ने कई लोगों को आर्थिक, सामाजिक और मानसिक रूप से प्रभावित किया है।

जिन ऐप्स का नाम जांच में सामने आया है, उनमें Kala Ghati Likka, Rupeejar, Cashloop, Credit Shakti, Fincure, FlexCredit, Open Credit, Open Limit, Tina Credit, Open Pay, Online Loan, Rishfin Rupee Line, Sunny Rupee, Kaujalgi Shkh, Jai Credit, Cash Daily, Grow Cash, Kubslon, Payshaki और Nebula Cash शामिल हैं।

विमल जैन ने दावा किया कि उनकी रिसर्च के आधार पर यह संभावना सामने आई है कि इन ऐप्स के पीछे काम करने वाले कुछ नेटवर्क पाकिस्तान से जुड़े हो सकते हैं। उनका कहना है कि कई शिकायतों में सामने आए रिकवरी कॉल और संपर्क नंबर पाकिस्तान से संचालित प्रतीत होते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इन दावों की पुष्टि सक्षम जांच एजेंसियों द्वारा विस्तृत जांच के बाद ही हो सकती है।

जैन के अनुसार, मानव सेवा मिशन ने स्वयं भी ऐसे मामलों का सामना किया है और कई पीड़ितों की सहायता करते हुए इन ऐप्स की कथित गतिविधियों का अध्ययन किया है। उन्होंने कहा कि यह केवल वित्तीय धोखाधड़ी का मामला नहीं है, बल्कि लोगों की निजता, सम्मान और मानसिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ विषय है।

उन्होंने देश के मीडिया संस्थानों से अपील की कि वे इस अभियान में सहयोग करें और आम जनता को ऐसे कथित फर्जी लोन ऐप्स के खतरों के प्रति जागरूक बनाएं। जैन का मानना है कि मीडिया की सक्रिय भूमिका से अधिक लोग जागरूक होंगे और संभावित पीड़ितों को समय रहते सावधान किया जा सकेगा।

विमल जैन ने घोषणा की कि वे शीघ्र ही हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर करने जा रहे हैं। इस याचिका के माध्यम से वे इन ऐप्स की विस्तृत जांच, इनके संचालन की पारदर्शी समीक्षा तथा कानून का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे।

उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें आश्चर्य है कि अनेक शिकायतों और आरोपों के बावजूद ऐसे ऐप्स अभी भी Google Play Store पर उपलब्ध हैं और अपना कारोबार जारी रखे हुए हैं। उनके अनुसार, इन ऐप्स की स्वामित्व संरचना, डेटा उपयोग नीति और रिकवरी प्रक्रियाओं की गहन जांच की जानी चाहिए ताकि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

विमल जैन ने बताया कि उनकी रिसर्च अभी भी जारी है और उनकी टीम लगातार नए तथ्यों तथा शिकायतों को एकत्र कर रही है। उन्होंने कहा कि जांच अभी समाप्त नहीं हुई है और आने वाले समय में और भी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि मानव सेवा मिशन का यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक ऐसे सभी कथित फर्जी लोन ऐप्स की पूरी तरह जांच नहीं हो जाती और आवश्यक कार्रवाई नहीं की जाती। जैन ने कहा कि जब तक ऐसे ऐप्स को Google Play Store पर उचित जांच के बिना संचालित होने दिया जाएगा, तब तक उनका मिशन जारी रहेगा। उनका उद्देश्य देश के नागरिकों को आर्थिक शोषण, ब्लैकमेलिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न और अन्य कथित अवैध गतिविधियों से सुरक्षित रखना है।

अंत में विमल जैन ने सरकार, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, तकनीकी प्लेटफॉर्म्स, सामाजिक संगठनों और मीडिया से मिलकर कार्य करने की अपील की ताकि डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग रोका जा सके और नागरिकों को सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जा सके।

नोट: इस लेख में उल्लिखित आरोप और दावे विमल जैन तथा उनके संगठनों द्वारा व्यक्त किए गए हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और सत्यता का निर्धारण संबंधित जांच एजेंसियों तथा न्यायिक प्रक्रिया द्वारा किया जाना आवश्यक है।
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