Category:
Politics (राजनीति)
State:
Rajasthan
2026-06-24 03:05:00
सरकारें बदलीं, वादे बदले, लेकिन तबादला नीति का मसौदा अब तक फाइलों में कैद; कर्मचारी और आमजन दोनों प्रभावित
"तबादला नीति अब भी अधूरी: 35 साल बाद भी कर्मचारियों को पारदर्शी व्यवस्था का इंतजार"
सरकारें बदलीं, वादे बदले, लेकिन तबादला नीति का मसौदा अब तक फाइलों में कैद; कर्मचारी और आमजन दोनों प्रभावित
जयपुर | संवाददाता श्रवण पंवार | NMS.NEWS
राजस्थान में पारदर्शी और व्यवस्थित तबादला नीति लागू करने की मांग पिछले कई दशकों से उठती रही है, लेकिन आज भी लाखों कर्मचारी स्पष्ट और स्थायी नीति के अभाव में अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। वर्ष 1991 में उच्च न्यायालय द्वारा तबादलों को लेकर दिशा-निर्देश दिए जाने के बावजूद आज तक कोई ठोस और स्थायी नीति धरातल पर लागू नहीं हो सकी है।
विभिन्न सरकारों ने अपने-अपने कार्यकाल में तबादला नीति का मसौदा तैयार करने और उसे लागू करने के दावे किए, लेकिन अधिकांश प्रयास फाइलों और चर्चाओं तक ही सीमित रह गए। कर्मचारियों का कहना है कि पारदर्शी नीति नहीं होने से कई बार वर्षों तक एक ही स्थान पर पदस्थापन और दूसरी ओर बार-बार तबादलों जैसी समस्याएं सामने आती हैं।
हाल के वर्षों में तबादलों को लेकर कई विवाद भी चर्चा में रहे। राजनीतिक हस्तक्षेप, सिफारिशों और कथित लेन-देन के आरोपों ने व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि यदि स्पष्ट नीति लागू हो जाए तो न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली मजबूत होगी बल्कि कर्मचारियों में भी विश्वास बढ़ेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल और पारदर्शी तबादला प्रणाली समय की आवश्यकता है। इससे कर्मचारियों की वरिष्ठता, सेवा अवधि, विशेष परिस्थितियों और विभागीय जरूरतों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय संभव हो सकेंगे।
अब कर्मचारियों और आम जनता की नजर सरकार पर टिकी है कि वर्षों से लंबित इस महत्वपूर्ण विषय पर कब निर्णायक कदम उठाया जाएगा और तबादला प्रक्रिया को पारदर्शी तथा विवाद-मुक्त बनाया जाएगा।
संवाददाता: श्रवण पंवार
स्थान: जयपुर, राजस्थान
NMS.NEWS
दिनांक: 24 जून 2026