Category:
Religion (धर्म)
State:
Uttarakhand
2026-07-13 11:36:32
रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से गांव खाली; विशेषज्ञ बोले—अब ठोस नीति और स्थानीय विकास ही समाधान
उत्तराखंड के सैकड़ों गांव वीरान होने की कगार पर, पलायन ने बदली पहाड़ की तस्वीर
रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से गांव खाली; विशेषज्ञ बोले—अब ठोस नीति और स्थानीय विकास ही समाधान
जयपुर | संवाददाता: श्रवण पंवार | NMS.NEWS
उत्तराखंड में लगातार बढ़ता पलायन राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। सरकारी आंकड़ों और विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, पिछले डेढ़ दशक में बड़ी संख्या में गांव आंशिक या पूर्ण रूप से खाली हो चुके हैं। रोजगार, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और आधारभूत ढांचे की कमी के कारण लोग गांव छोड़कर शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ों के गांवों में युवाओं के लिए रोजगार के सीमित अवसर, खेती की घटती उपयोगिता और मूलभूत सुविधाओं का अभाव पलायन की सबसे बड़ी वजह बन रहे हैं। इसका सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था, पारंपरिक संस्कृति और पर्यावरणीय संतुलन पर भी दिखाई दे रहा है।
कई गांवों में स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार घट रही है, जबकि अनेक मकान वर्षों से बंद पड़े हैं। कभी आबाद रहने वाले गांव अब सुनसान नजर आते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार, पर्यटन, कृषि आधारित उद्योग, डिजिटल कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य सेवाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देकर पलायन की गति को कम किया जा सकता है। साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अलग और दीर्घकालिक विकास नीति लागू करने की आवश्यकता बताई जा रही है।
NMS.NEWS विश्लेषण:
"पलायन केवल जनसंख्या का स्थानांतरण नहीं, बल्कि गांवों की संस्कृति, विरासत और सामाजिक जीवन के धीरे-धीरे समाप्त होने का संकेत है। यदि समय रहते प्रभावी नीतियां लागू नहीं की गईं, तो आने वाले वर्षों में कई और गांव केवल इतिहास का हिस्सा बनकर रह जाएंगे।"