Category:
Army (सेना)
State:
Delhi
2026-08-23 02:48:14
पाकिस्तान में बढ़ी सैन्य एयरलिफ्ट गतिविधि, भारत की सुरक्षा एजेंसियों की नजर
पाकिस्तान के आसमान में 60 घंटे तक चीन-तुर्किये के सैन्य विमानों की हलचल, ड्रोन व रक्षा उपकरणों की संभावित सप्लाई से बढ़ी सुरक्षा चिंता
पाकिस्तान में बढ़ी सैन्य एयरलिफ्ट गतिविधि, भारत की सुरक्षा एजेंसियों की नजर
इस्लामाबाद/नई दिल्ली। पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों के आसपास पिछले दिनों चीन और तुर्किये के सैन्य परिवहन विमानों की असामान्य आवाजाही चर्चा में है। रिपोर्टों के अनुसार करीब 60 घंटे के दौरान कई सैन्य विमानों ने पाकिस्तान के एयरबेसों के चक्कर लगाए, जिससे संभावित रक्षा उपकरणों की आपूर्ति को लेकर सुरक्षा संबंधी सवाल उठे हैं।
सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक चीनी सैन्य परिवहन विमान रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस और कराची के मसूर एयरबेस पर देखे गए, जबकि तुर्किये का सैन्य परिवहन विमान भी इस गतिविधि में शामिल बताया गया है। हालांकि इन विमानों में वास्तव में क्या सामग्री लाई गई, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए ड्रोन अथवा अन्य हथियारों की सप्लाई की बात को फिलहाल संभावना और सुरक्षा सूत्रों के दावे के रूप में ही देखा जा रहा है।
रक्षा सहयोग बढ़ने के बीच गतिविधि ने बढ़ाई चिंता
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पाकिस्तान और तुर्किये के बीच रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। 7 अगस्त 2026 को पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें रक्षा सहयोग, संयुक्त सैन्य अभ्यास और आधुनिक सैन्य तकनीक में सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है। तुर्किये ने विशेष रूप से ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और एआई जैसी क्षमताओं में सहयोग को प्राथमिकता देने की बात कही है।
भारत के लिए क्या मायने?
पाकिस्तान में चीनी और तुर्किये के सैन्य विमानों की बढ़ी गतिविधि को भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठान क्षेत्रीय सुरक्षा के व्यापक संदर्भ में देख रहा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि हालिया एयरलिफ्ट में ड्रोन या कोई विशेष हथियार प्रणाली लाई गई है। ऐसे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय विमानों की आवाजाही, संभावित सैन्य सामग्री और पाकिस्तान की रक्षा तैयारियों पर नजर रखना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार चीन-पाकिस्तान और तुर्किये-पाकिस्तान के बढ़ते रक्षा संबंध आने वाले समय में दक्षिण एशिया की सामरिक स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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