Category:
Police (पुलिस)
State:
Maharashtra
2026-08-23 03:23:26
मुंबई। महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा सीखने और प्रशिक्षण से जुड़ी व्यवस्था को लेकर यूनियन और परिवहन विभाग के बीच मतभेद सामने आए हैं। यूनियन प्रतिनिधियों का कहना है कि बड़ी संख्या में चालक अभी तक मराठी भाषा का पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं ले पाए हैं, ऐसे में तत्काल कार्रवाई करने के बजाय सरकार को अतिरिक्त समय देना चाहिए।
मराठी भाषा प्रशिक्षण को लेकर ऑटो-रिक्शा यूनियनों में नाराजगी, सरकार से 3 माह अतिरिक्त समय की मांग
मुंबई। महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा सीखने और प्रशिक्षण से जुड़ी व्यवस्था को लेकर यूनियन और परिवहन विभाग के बीच मतभेद सामने आए हैं। यूनियन प्रतिनिधियों का कहना है कि बड़ी संख्या में चालक अभी तक मराठी भाषा का पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं ले पाए हैं, ऐसे में तत्काल कार्रवाई करने के बजाय सरकार को अतिरिक्त समय देना चाहिए।
ऑटो-रिक्शा चालक संगठन के प्रतिनिधि शशांक राव के अनुसार, परिवहन मंत्री को पत्र भेजकर करीब तीन महीने का अतिरिक्त समय मांगा गया है। उनका कहना है कि जब तक सरकार इस मांग पर निर्णय नहीं लेती, तब तक चालकों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई रोकना उचित होगा।
वहीं, स्वाभिमान टैक्सी-रिक्शा यूनियन के अध्यक्ष के.के. तिवारी ने मराठी भाषा सीखने की पहल का स्वागत करते हुए लाइसेंस रद्द करने की धमकी को अनुचित बताया। उनका आरोप है कि कई स्थानों पर मराठी प्रशिक्षण के नाम पर 500 रुपये तक शुल्क वसूला जा रहा है और कुछ चालकों पर संगठन की सदस्यता लेने का दबाव भी बनाया जा रहा है।
बताया गया कि चालकों के लिए मुफ्त मराठी प्रशिक्षण अभियान भी चलाया गया था, जिसमें करीब 1.65 लाख चालकों ने प्रशिक्षण लिया। निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के बाद परिवहन विभाग की ओर से राज्यभर में जमीनी स्तर पर जांच और भाषा संबंधी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
यूनियनों का कहना है कि भाषा सीखने की प्रक्रिया को दंडात्मक कार्रवाई से जोड़ने के बजाय प्रशिक्षण केंद्रों की संख्या बढ़ाकर, वरिष्ठ चालकों को राहत देकर और पर्याप्त समय देकर इसे लागू किया जाना चाहिए। इससे नियमों का पालन भी होगा और हजारों ऑटो-रिक्शा चालकों पर अचानक कार्रवाई की स्थिति भी नहीं बनेगी।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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