Category:
Land Records (भूमि अभिलेख)
State:
Rajasthan
2026-08-24 03:45:42
भीलवाड़ा में यूआईटी से जुड़ी जमीनों के रिकॉर्ड और प्लॉट आवंटन को लेकर सामने आई कथित अनियमितताओं ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, करीब 300 करोड़ रुपये मूल्य की भूमि से जुड़े मामले में भूमाफियाओं के साथ कथित मिलीभगत कर रिकॉर्ड में लगभग 950 भूखंडों के फर्जी मालिक दर्ज किए जाने का आरोप है।
भूमाफिया–यूआईटी गठजोड़ का बड़ा खुलासा! 300 करोड़ की जमीन पर 950 फर्जी प्लॉट मालिकों का खेल
भीलवाड़ा | संवाददाता श्रवण पंवार, जयपुर | NMS.NEWS
भीलवाड़ा में यूआईटी से जुड़ी जमीनों के रिकॉर्ड और प्लॉट आवंटन को लेकर सामने आई कथित अनियमितताओं ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, करीब 300 करोड़ रुपये मूल्य की भूमि से जुड़े मामले में भूमाफियाओं के साथ कथित मिलीभगत कर रिकॉर्ड में लगभग 950 भूखंडों के फर्जी मालिक दर्ज किए जाने का आरोप है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यूआईटी क्षेत्र में करीब 499 बीघा भूमि के रिकॉर्ड की पड़ताल में 288 बीघा भूमि के आवंटन से जुड़े दस्तावेज सामने आए हैं, जबकि 211 बीघा भूमि का रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में बताया गया है। आरोप है कि जमीन के वास्तविक रिकॉर्ड में हेरफेर कर अलग-अलग लोगों के नाम भूखंड दर्ज किए गए और बाद में इन्हें अन्य व्यक्तियों को हस्तांतरित करने का प्रयास किया गया।
रिकॉर्ड में नाम, लेकिन मौके पर नहीं मिले मालिक
जांच रिपोर्ट में कुछ ऐसे नाम और भूखंड सामने आने का दावा किया गया है, जिनके संबंध में मौके पर वास्तविक मालिकों की जानकारी नहीं मिल सकी। रिपोर्ट में मोहन के नाम दर्ज 18 प्लॉट और गुलाबी के नाम पटेलनगर क्षेत्र में दर्ज 15 प्लॉट का भी उल्लेख किया गया है। इन प्रविष्टियों की वास्तविकता और दस्तावेजों की वैधता की जांच अब महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
319 भूखंड पहले ही निरस्त किए जाने का दावा
रिपोर्ट में यूआईटी द्वारा संदिग्ध रिकॉर्ड के आधार पर 319 भूखंड निरस्त किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि कुछ मामलों में रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने के बावजूद संबंधित व्यक्तियों के दस्तावेज मांगे जाने पर वास्तविक पहचान या स्वामित्व स्पष्ट नहीं हो सका।
मामला सिर्फ जमीन का नहीं, रिकॉर्ड व्यवस्था पर भी सवाल
यदि सामने आए आरोप जांच में सही साबित होते हैं तो मामला केवल जमीन के कथित फर्जी आवंटन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यूआईटी के रिकॉर्ड सत्यापन, दस्तावेजी प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े होंगे। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच के साथ मूल रिकॉर्ड, रजिस्ट्री दस्तावेज, नामांतरण और भूखंड आवंटन की पूरी श्रृंखला का मिलान जरूरी है।
NMS.NEWS की रिपोर्टिंग के अनुसार, मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित जांच और आधिकारिक दस्तावेजों से ही होगी। संबंधित अधिकारियों एवं आरोपित पक्ष का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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