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Category: Insurance (बीमा)    State: Delhi

2026-08-24 03:53:33

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) किसानों को प्राकृतिक आपदा और फसल नुकसान से आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी, लेकिन बीमा प्रीमियम, नुकसान के आकलन और क्लेम भुगतान को लेकर किसानों की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक पिछले दो वर्षों में देशभर में करीब 73 लाख किसान योजना से बाहर हुए हैं। इनमें राजस्थान के करीब 6.79 लाख किसान शामिल हैं

फसल बीमा से किसानों का भरोसा घटा? दो साल में 73 लाख ने छोड़ी PMFBY, राजस्थान में 6.79 लाख किसान बाहर



प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) किसानों को प्राकृतिक आपदा और फसल नुकसान से आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी, लेकिन बीमा प्रीमियम, नुकसान के आकलन और क्लेम भुगतान को लेकर किसानों की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक पिछले दो वर्षों में देशभर में करीब 73 लाख किसान योजना से बाहर हुए हैं। इनमें राजस्थान के करीब 6.79 लाख किसान शामिल हैं।

क्लेम मिलने में देरी और नुकसान के आकलन पर सवाल

फसल नुकसान होने के बाद किसानों को बीमा क्लेम मिलने में लंबा समय लगना एक बड़ी चिंता बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार नुकसान का आकलन कई मामलों में सैटेलाइट और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर वास्तविक नुकसान और तकनीकी आकलन के बीच अंतर होने पर किसान को अपेक्षित मुआवजा नहीं मिल पाता।

राजस्थान में भी बड़ी संख्या में किसान योजना से बाहर

आंकड़ों में राजस्थान में करीब 6.79 लाख किसानों के योजना से बाहर होने की बात सामने आई है। इसके पीछे फसल बीमा को लेकर किसानों का अनुभव, प्रीमियम और क्लेम प्रक्रिया सहित कई कारण बताए जा रहे हैं। ऐसे में राज्य में योजना की प्रभावशीलता और किसानों तक वास्तविक लाभ पहुंचने की स्थिति की समीक्षा जरूरी हो गई है।

महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा कमी

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र में दो वर्षों के दौरान करीब 36.83 लाख किसान योजना से बाहर हुए। राजस्थान के बाद भी यह संख्या काफी बड़ी है। अन्य राज्यों में भी किसानों की संख्या में कमी दर्ज की गई है।

किसानों की मांग—क्लेम प्रक्रिया हो सरल और समयबद्ध

किसानों का कहना है कि बीमा योजना तभी प्रभावी मानी जाएगी, जब फसल खराब होने के बाद नुकसान का आकलन जल्द हो और पात्र किसानों को पारदर्शी तरीके से समय पर क्लेम मिले। किसानों की मांग है कि सैटेलाइट आधारित आकलन के साथ स्थानीय सत्यापन को भी मजबूत किया जाए तथा क्लेम अस्वीकृत होने पर किसान को स्पष्ट कारण और अपील का प्रभावी अवसर मिले।

NMS.NEWS की पड़ताल में मुख्य सवाल यही है—जब फसल बीमा किसानों की सुरक्षा के लिए है, तो इतनी बड़ी संख्या में किसान इससे बाहर क्यों हो रहे हैं? सरकार और बीमा कंपनियों के लिए यह आंकड़ा योजना की जमीनी समीक्षा का संकेत माना जा सकता है।

संवाददाता: श्रवण पंवार, जयपुर
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