Category:
Court (न्यायालय)
State:
Rajasthan
2026-08-25 08:37:23
जोधपुर/पाली/बालोतरा। पश्चिमी राजस्थान की जोजरी, बांडी और लूणी नदियों में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने अंतरिम सुरक्षा उपाय के तहत नदी किनारे से 100 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के निर्माण और विकास गतिविधियों पर रोक लगा दी है
जोजरी-बांडी-लूणी नदी तंत्र पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 100 मीटर में निर्माण पर रोक; प्रदूषणकारी उद्योगों पर भी कड़ा शिकंजा
जोधपुर/पाली/बालोतरा। पश्चिमी राजस्थान की जोजरी, बांडी और लूणी नदियों में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने अंतरिम सुरक्षा उपाय के तहत नदी किनारे से 100 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के निर्माण और विकास गतिविधियों पर रोक लगा दी है।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि जब तक हाई फ्लड लाइन और आवश्यक पर्यावरणीय बफर जोन का वैज्ञानिक तरीके से निर्धारण एवं सीमांकन नहीं हो जाता, तब तक नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को अतिरिक्त सुरक्षा देना जरूरी है। मामले में अगली सुनवाई 22 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
500 मीटर क्षेत्र में प्रदूषणकारी गतिविधियों पर भी निगरानी
मामले से संबंधित ताजा रिपोर्टों के अनुसार, नदी की मौजूदा फ्लड लाइन या प्रवाह मार्ग के दोनों ओर 500 मीटर क्षेत्र में खतरनाक अथवा प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक गतिविधियों पर भी रोक/कड़ी पाबंदी की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य नदी में औद्योगिक अपशिष्ट के प्रवेश को रोकना और नदी तंत्र को सुरक्षित करना है।
प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था पर भी सवाल
जोजरी नदी में लंबे समय से औद्योगिक प्रदूषण की शिकायतों के बीच सुप्रीम कोर्ट पहले भी अधिकारियों और प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था की भूमिका पर सवाल उठा चुका है। मई 2026 में अदालत के समक्ष जोजरी में कथित अवैध औद्योगिक अपशिष्ट प्रवाह से जुड़ी करीब 4 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन का मामला भी सामने आया था।
नदी संरक्षण के लिए बनेगा एकीकृत तंत्र
राज्य सरकार को जोजरी-बांडी-लूणी नदी तंत्र के प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए एकीकृत समन्वय समूह और व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसमें पर्यावरण, जल संसाधन, उद्योग, नगरीय विकास और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विभागों की भूमिका तय की जानी है।
रिपोर्ट: श्रवण पंवार
जयपुर | NMS.NEWS
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