Category:
Crime (अपराध)
State:
Rajasthan
2026-08-26 02:32:30
जयपुर। वर्ष 2023 में राजस्थान में चर्चित रहे 2 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगने के मामले में अब जांच को लेकर नया अपडेट सामने आया है। अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, एसओजी की तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दिव्या मित्तल से जुड़े इस प्रकरण में एसीबी ने पूर्व कांस्टेबल सुमित कुमार को आरोपी के तौर पर आगे कार्रवाई से राहत देते हुए क्लोजर रिपोर्ट पेश की है
2 करोड़ की घूस के मामले में बड़ा मोड़: एसीबी ने पूर्व कांस्टेबल सुमित कुमार को दी क्लीनचिट, दिव्या मित्तल के खिलाफ भी जांच में नहीं मिले पर्याप्त सबूत
जयपुर। वर्ष 2023 में राजस्थान में चर्चित रहे 2 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगने के मामले में अब जांच को लेकर नया अपडेट सामने आया है। अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, एसओजी की तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दिव्या मित्तल से जुड़े इस प्रकरण में एसीबी ने पूर्व कांस्टेबल सुमित कुमार को आरोपी के तौर पर आगे कार्रवाई से राहत देते हुए क्लोजर रिपोर्ट पेश की है।
मामला उस समय सामने आया था, जब एक दवा कारोबारी से कथित तौर पर मादक पदार्थ तस्करी के मामले में कार्रवाई से बचाने और नाम हटाने के एवज में 2 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। एसीबी ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू की थी। आधिकारिक एफआईआर में भी दो करोड़ रुपए की मांग और सुमित के माध्यम से रकम तय किए जाने का उल्लेख दर्ज है।
सुमित को पहले बताया गया था अहम कड़ी
शुरुआती जांच के दौरान सुमित कुमार को मामले में कथित मध्यस्थ बताया गया था और उसकी तलाश भी की गई थी। उस समय मीडिया रिपोर्टों में उसे दिव्या मित्तल से जुड़े रिश्वत प्रकरण की महत्वपूर्ण कड़ी बताया गया था।
अब अखबार की 26 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, एसीबी की आगे की जांच में सुमित कुमार के खिलाफ आरोप सिद्ध करने योग्य पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के आधार पर उसे राहत दी गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दिव्या मित्तल के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच में भी पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण प्रकरण में क्लोजर की कार्रवाई की गई।
रिसॉर्ट से शुरू हुआ था विवाद
इस पूरे प्रकरण में उदयपुर स्थित रिसॉर्ट भी जांच के केंद्र में रहा था। शुरुआती कार्रवाई के दौरान एसीबी ने दिव्या मित्तल और सुमित कुमार से जुड़े ठिकानों पर तलाशी ली थी।
हालांकि, क्लोजर रिपोर्ट का अंतिम प्रभाव न्यायालय द्वारा उसे स्वीकार किए जाने पर निर्भर करता है। इसलिए इसे अभी अदालत से अंतिम रूप से दोषमुक्ति का आदेश मानना उचित नहीं होगा।
संवाददाता — श्रवण पंवार
जयपुर | NMS.NEWS
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