Category:
Politics (राजनीति)
State:
Rajasthan
2026-09-06 06:17:41
जयपुर। राजस्थान में आगामी नगर निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों ने प्रत्याशियों के चयन पर जोर देना शुरू कर दिया है। नामांकन वापसी के बाद सामने आए आंकड़ों के अनुसार 77 प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। इनमें भाजपा के 44, निर्दलीय 19 और कांग्रेस के 14 प्रत्याशी शामिल हैं। निर्विरोध निर्वाचन के आंकड़ों ने निकाय चुनाव से पहले स्थानीय स्तर पर राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
📰 निकाय चुनाव में बड़ा सियासी समीकरण
77 प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित, भाजपा को सबसे ज्यादा बढ़त; कांग्रेस में युवाओं को मिला मौका
जयपुर। राजस्थान में आगामी नगर निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों ने प्रत्याशियों के चयन पर जोर देना शुरू कर दिया है। नामांकन वापसी के बाद सामने आए आंकड़ों के अनुसार 77 प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। इनमें भाजपा के 44, निर्दलीय 19 और कांग्रेस के 14 प्रत्याशी शामिल हैं। निर्विरोध निर्वाचन के आंकड़ों ने निकाय चुनाव से पहले स्थानीय स्तर पर राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
भाजपा के कई वार्डों में निर्विरोध जीत
नामांकन प्रक्रिया के बाद कुछ निकायों में भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति बनी है। रिपोर्ट के मुताबिक बेंगू और बिलाड़ा सहित कुछ निकायों में भाजपा का प्रभाव दिखाई दिया, जहां कई वार्डों में पार्टी प्रत्याशी निर्विरोध चुने गए। इससे संबंधित क्षेत्रों में भाजपा के संगठनात्मक प्रभाव को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह है।
कांग्रेस ने युवाओं पर जताया भरोसा
दूसरी ओर कांग्रेस ने प्रत्याशी चयन में युवा चेहरों को प्राथमिकता देने का संकेत दिया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कांग्रेस के 43.59 प्रतिशत प्रत्याशियों की उम्र 40 वर्ष से कम है, जबकि 76 प्रतिशत प्रत्याशी 50 वर्ष से कम उम्र के हैं। इससे साफ है कि पार्टी ने निकाय चुनाव में अपेक्षाकृत युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाई है।
आरक्षित वर्ग को भी प्रतिनिधित्व
प्रत्याशी चयन में सामाजिक प्रतिनिधित्व पर भी राजनीतिक दलों का जोर रहा। रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस की सामान्य सीटों पर उतारे गए प्रत्याशियों में करीब 32 प्रतिशत टिकट आरक्षित वर्ग से जुड़े उम्मीदवारों को दिए गए हैं। पार्टी की ओर से इसे सामाजिक भागीदारी बढ़ाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
सोशल इंजीनियरिंग और स्थानीय समीकरण अहम
निकाय चुनाव में प्रत्याशी चयन के साथ-साथ जातीय एवं सामाजिक समीकरण, स्थानीय प्रभाव, युवा चेहरों और आरक्षित वर्ग के प्रतिनिधित्व को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस ने सोशल इंजीनियरिंग पर जोर देते हुए विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है, वहीं भाजपा के निर्विरोध निर्वाचित प्रत्याशियों की संख्या स्थानीय स्तर पर पार्टी की स्थिति को मजबूत करने वाला संकेत मानी जा रही है।
निकाय चुनाव के अंतिम परिणाम आने तक मुकाबले की तस्वीर और स्पष्ट होगी। स्थानीय मुद्दे, प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़ और वार्ड स्तर के समीकरण चुनावी परिणामों में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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