Category:
Army (सेना)
State:
Rajasthan
2026-08-26 02:43:57
जयपुर। भारत ने मिसाइल तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) से जुड़ी जानकारी के अनुसार देश में मिसाइलों के लिए स्वदेशी वारहेड और संबंधित प्रणालियों के विकास पर तेजी से काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों में विदेशी निर्भरता कम करना और देश में ही महत्वपूर्ण रक्षा तकनीक तैयार करना है।
अब मिसाइलों में भी बनेंगे स्वदेशी वारहेड, भारत ने बढ़ाई रक्षा आत्मनिर्भरता की रफ्तार
जयपुर। भारत ने मिसाइल तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) से जुड़ी जानकारी के अनुसार देश में मिसाइलों के लिए स्वदेशी वारहेड और संबंधित प्रणालियों के विकास पर तेजी से काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों में विदेशी निर्भरता कम करना और देश में ही महत्वपूर्ण रक्षा तकनीक तैयार करना है।
रिपोर्ट के मुताबिक मिसाइल के वारहेड में इस्तेमाल होने वाली तकनीक को अधिक प्रभावी और विश्वसनीय बनाने के लिए अनुसंधान एवं परीक्षण किए जा रहे हैं। आधुनिक युद्ध परिस्थितियों में मिसाइल की मारक क्षमता के साथ उसके वारहेड की तकनीक भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
स्वदेशी तकनीक से मजबूत होगी रक्षा क्षमता
विशेषज्ञों के अनुसार स्वदेशी वारहेड तकनीक विकसित होने से भारत को मिसाइल प्रणालियों के निर्माण और आधुनिकीकरण में रणनीतिक बढ़त मिल सकती है। इससे महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों के लिए आयात पर निर्भरता घटाने और घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
भारत पिछले कुछ वर्षों में मिसाइल, रडार, ड्रोन और अन्य रक्षा प्रणालियों के स्वदेशी विकास पर विशेष जोर दे रहा है। इसी कड़ी में DRDO तथा भारतीय रक्षा उद्योग द्वारा नई तकनीकों को विकसित कर उनका परीक्षण किया जा रहा है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम कदम
स्वदेशी वारहेड तकनीक का विकास केवल सैन्य क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की रक्षा आत्मनिर्भरता और रणनीतिक सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में इन तकनीकों के सफल परीक्षण और उत्पादन से भारतीय रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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