Category:
Court (न्यायालय)
State:
Rajasthan
2026-08-27 05:14:47
जयपुर में भूखंड आवंटन से जुड़ा एक पुराना मामला करीब दो दशक बाद फिर चर्चा में आया है। निर्माण सोसायटी के भूखंड आवंटन से संबंधित रिकॉर्ड सामने आने के बाद पता चला कि एक ही भूखंड को लेकर वर्षों तक आवंटन, निरस्तीकरण और बकाया राशि जमा कराने की प्रक्रिया चलती रही।
📰 20 साल पहले मिला भूखंड, 16 साल पहले हुआ निरस्त; अब जे़डीए के रिकॉर्ड ने खोली पूरी कहानी
जयपुर | संवाददाता श्रवण पंवार | NMS.NEWS
जयपुर में भूखंड आवंटन से जुड़ा एक पुराना मामला करीब दो दशक बाद फिर चर्चा में आया है। निर्माण सोसायटी के भूखंड आवंटन से संबंधित रिकॉर्ड सामने आने के बाद पता चला कि एक ही भूखंड को लेकर वर्षों तक आवंटन, निरस्तीकरण और बकाया राशि जमा कराने की प्रक्रिया चलती रही।
पहले वन विभाग की जमीन में हुआ आवंटन, बाद में बदला भूखंड
मामला जयपुर के जोन-24 स्थित हरसपुरा डेयरी योजना से जुड़ा बताया जा रहा है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, जे़डीए ने 30 जनवरी 2004 को हनुमान मीणा के नाम 270 वर्गमीटर के भूखंड संख्या E-19 का आवंटन किया था। बाद में 26 फरवरी 2004 को राशि जमा कराए जाने के बावजूद जांच में सामने आया कि संबंधित भूखंड वन विभाग की जमीन में आवंटित हो गया था।
इसके बाद जे़डीए ने वर्ष 2006 में योजना को रिवाइज कर भूखंड संख्या E-69 का आवंटन किया। रिकॉर्ड के मुताबिक यह भूखंड 5 मई 2010 को आवंटी के पक्ष में आवंटित किया गया।
2017 में आवंटन निरस्त, 2018 में बकाया जमा कराने को लिखा पत्र
मामले में नया मोड़ वर्ष 2017 में आया, जब जे़डीए ने भूखंड E-69 का आवंटन निरस्त कर दिया। इसके बाद वर्ष 2018 में आवंटी की ओर से बकाया राशि जमा कराने के लिए जे़डीए को पत्र दिए जाने का उल्लेख सामने आया।
लगभग एक दशक बाद 2026 में आवंटी ने फ्री-होल्ड पट्टा जारी कराने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया। आवेदन की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर जे़डीए के रिकॉर्ड में पुराने निरस्तीकरण का मामला फिर सामने आया। संबंधित जोन उपायुक्त की ओर से भी रिकॉर्ड के आधार पर यह बताया गया कि भूखंड का आवंटन वर्ष 2017 में निरस्त हो चुका है और वर्तमान रिकॉर्ड में भूखंड जे़डीए के नाम दर्ज है।
20 साल पुराने रिकॉर्ड ने उठाए कई सवाल
इस पूरे प्रकरण ने जे़डीए की पुरानी आवंटन प्रक्रिया, रिकॉर्ड अपडेट और निरस्त भूखंडों की स्थिति को लेकर सवाल खड़े किए हैं। एक ओर आवंटन और संशोधित भूखंड का इतिहास सामने आता है, वहीं दूसरी ओर वर्षों बाद फ्री-होल्ड पट्टे के लिए आवेदन किए जाने से पुराने रिकॉर्ड की दोबारा जांच की जरूरत महसूस हुई।
अब पूरे मामले में संबंधित दस्तावेजों, आवंटन आदेशों, निरस्तीकरण आदेश और जमा राशि के रिकॉर्ड का मिलान ही स्थिति को स्पष्ट कर सकता है।
संवाददाता — श्रवण पंवार
जयपुर | NMS.NEWS
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