Category:
Crime (अपराध)
State:
Rajasthan
2026-08-28 04:10:06
छह महीने में चोरी-लूट के करीब ₹70 करोड़ के मामले, साइबर ठगी में जून तक ₹387 करोड़ से अधिक की रकम जयपुर। राजस्थान में पारंपरिक अपराधों के साथ-साथ साइबर अपराध का दायरा भी तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। प्रदेश में चोरी, लूट और डकैती से जुड़े मामलों की जांच के लिए बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारियों को लगाया गया है, वहीं साइबर ठगी के बढ़ते मामलों ने पुलिस के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
साइबर अपराध पर राजस्थान में बढ़ा दबाव, हजारों जांच अधिकारी फिर भी विशेषज्ञ जांच तंत्र की कमी
छह महीने में चोरी-लूट के करीब ₹70 करोड़ के मामले, साइबर ठगी में जून तक ₹387 करोड़ से अधिक की रकम
जयपुर। राजस्थान में पारंपरिक अपराधों के साथ-साथ साइबर अपराध का दायरा भी तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। प्रदेश में चोरी, लूट और डकैती से जुड़े मामलों की जांच के लिए बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारियों को लगाया गया है, वहीं साइबर ठगी के बढ़ते मामलों ने पुलिस के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में जून तक साइबर ठगी की 96,886 शिकायतें दर्ज हो चुकी थीं। वर्ष 2025 में यह आंकड़ा 1,27,782 और वर्ष 2024 में 1,00,042 शिकायतों तक पहुंचा था। तीन वर्षों में साइबर ठगी से जुड़ी शिकायतों में बड़ी संख्या में लोगों को आर्थिक नुकसान हुआ और रिपोर्ट की गई ठगी की रकम करीब ₹1,345 करोड़ तक पहुंच गई।
43 साइबर थानों के बावजूद विशेषज्ञों की कमी
प्रदेश में साइबर अपराध की जांच के लिए 43 साइबर थाने बनाए गए हैं, लेकिन इन थानों में विशेषज्ञ अधिकारियों और प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक साइबर अपराध की तकनीकी जांच के लिए उपलब्ध पुलिस बल की तुलना में मामलों का दबाव काफी अधिक है।
साइबर अपराध में ठगी के लिए नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। फर्जी बैंक खाते, डिजिटल भुगतान, सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल कर अपराधी लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे मामलों में रकम अलग-अलग खातों में तेजी से ट्रांसफर होने के कारण पुलिस के लिए समय पर कार्रवाई करना चुनौतीपूर्ण बन जाता है।
₹70 करोड़ की चोरी-लूट की जांच में 20 हजार से ज्यादा अधिकारी
राजस्थान में पिछले छह महीनों के दौरान चोरी, लूट और डकैती से जुड़े मामलों में करीब ₹70 करोड़ के नुकसान की जांच के लिए 20 हजार से अधिक पुलिस अधिकारियों को लगाया गया है। इसके बावजूद अपराध की प्रकृति लगातार बदल रही है, जिससे पुलिस व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक अपराधों के साथ साइबर अपराध की जांच के लिए अलग तकनीकी कैडर, बेहतर प्रशिक्षण और आधुनिक डिजिटल फॉरेंसिक संसाधनों की जरूरत है। केवल पुलिस बल बढ़ाने के बजाय साइबर जांच में विशेषज्ञता विकसित करना भी जरूरी होगा।
साइबर ठगी रोकने में जागरूकता भी अहम
पुलिस और साइबर विशेषज्ञ लगातार लोगों से अपील कर रहे हैं कि अनजान लिंक पर क्लिक न करें, OTP या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें और संदिग्ध ऑनलाइन लेनदेन की स्थिति में तत्काल शिकायत दर्ज कराएं। शुरुआती समय में शिकायत मिलने पर ठगी की रकम को रोकने या वापस दिलाने की संभावना बढ़ सकती है।
राजस्थान में बढ़ते साइबर अपराध ने साफ कर दिया है कि डिजिटल सुरक्षा अब केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आम नागरिक की सतर्कता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
NMS.NEWS — नवधृति मानवाधिकार समाचार