Category:
Business (व्यापार)
State:
Maharashtra
2026-08-28 04:34:36
मुंबई। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बड़ी कंपनियों की रणनीति अब रोजगार और उत्पादकता के सवालों के बीच उलझती दिखाई दे रही है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप की पैरेंट कंपनी Meta ने AI के इस्तेमाल के आधार पर कुछ टीमों में कर्मचारियों की संख्या में भारी कटौती की योजना बनाई थी, लेकिन अपेक्षित उत्पादकता लाभ नहीं मिलने और कर्मचारियों के विरोध के चलते यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
AI से बड़ी उम्मीदें, लेकिन नतीजे कमजोर; Meta ने 60% तक छंटनी की योजना से खींचे कदम
मुंबई। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बड़ी कंपनियों की रणनीति अब रोजगार और उत्पादकता के सवालों के बीच उलझती दिखाई दे रही है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप की पैरेंट कंपनी Meta ने AI के इस्तेमाल के आधार पर कुछ टीमों में कर्मचारियों की संख्या में भारी कटौती की योजना बनाई थी, लेकिन अपेक्षित उत्पादकता लाभ नहीं मिलने और कर्मचारियों के विरोध के चलते यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
रिपोर्ट के अनुसार, Meta की योजना कुछ टीमों में कर्मचारियों की संख्या करीब 60 फीसदी तक घटाने की थी। कंपनी का अनुमान था कि AI एजेंट रोजमर्रा के कामों को संभालेंगे और कम कर्मचारियों के साथ अधिक उत्पादकता हासिल की जा सकेगी। हालांकि, AI से उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं मिलने के कारण योजना को लेकर कंपनी के भीतर पुनर्विचार की स्थिति बनी।
AI का इस्तेमाल बढ़ा, लेकिन यूजर तक फायदा सीमित
रिपोर्ट में सामने आया कि Meta में AI के इस्तेमाल से कोडिंग में तेजी जरूर आई, लेकिन यूजर्स तक पहुंचने वाले नए या बेहतर फीचर्स में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई। AI से संबंधित कोड में सालाना करीब 220 प्रतिशत की वृद्धि बताई गई, जबकि नए अथवा बेहतर फीचर्स में वृद्धि लगभग 36 प्रतिशत रही।
इसके अलावा बड़ी तकनीकी समस्याओं और सुरक्षा संबंधी मामलों में भी बढ़ोतरी का उल्लेख किया गया है। ऐसे मामलों को सुलझाने में कर्मचारियों का समय भी अधिक लगा। इससे यह सवाल उठने लगा कि AI से हासिल होने वाली तकनीकी दक्षता का वास्तविक कारोबारी लाभ कितना हो रहा है।
कर्मचारियों के विरोध ने भी बदली रणनीति
Meta की ओर से कर्मचारियों की भूमिका और टीम संरचना में बड़े बदलाव की तैयारी थी। कंपनी का लक्ष्य था कि AI एजेंट रोजमर्रा के कार्यों का बड़ा हिस्सा संभालें और कर्मचारी अधिक महत्वपूर्ण एवं रचनात्मक काम पर ध्यान दें। लेकिन संभावित बड़े पैमाने पर छंटनी को लेकर कर्मचारियों के विरोध और उत्पादकता के अपेक्षित परिणाम नहीं आने से योजना को आगे बढ़ाने में मुश्किलें आईं।
विशेषज्ञों के अनुसार, AI आने वाले समय में कंपनियों की कार्यप्रणाली को जरूर बदलेगा, लेकिन केवल कर्मचारियों की संख्या घटाना ही उत्पादकता बढ़ाने का समाधान नहीं है। AI के साथ बेहतर प्रशिक्षण, मानव निगरानी और सही कार्यप्रवाह विकसित करना भी उतना ही जरूरी होगा।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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