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Category: Business (व्यापार)    State: Maharashtra

2026-08-28 04:32:14

जयपुर। देश में बदलती खाद्य आदतों और बढ़ती घरेलू मांग का असर अब खेती के पैटर्न पर भी साफ दिखाई देने लगा है। पारंपरिक गेहूं-चावल के साथ किसान मसालों, तिलहन और दालों जैसी अधिक मूल्य वाली फसलों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।

बदली खेती की तस्वीर: मसालों का उत्पादन 10 साल में 86% बढ़ा, तिलहन 70% और दालों में 57% उछाल

जयपुर। देश में बदलती खाद्य आदतों और बढ़ती घरेलू मांग का असर अब खेती के पैटर्न पर भी साफ दिखाई देने लगा है। पारंपरिक गेहूं-चावल के साथ किसान मसालों, तिलहन और दालों जैसी अधिक मूल्य वाली फसलों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, 2015-16 से 2024-25 के बीच मसालों का उत्पादन 69.9 लाख टन से बढ़कर 129.9 लाख टन हो गया, यानी करीब 85.9% की वृद्धि दर्ज की गई। इसी अवधि में तिलहन का उत्पादन 252.5 लाख टन से बढ़कर 429.9 लाख टन पहुंचा, जबकि दालों का उत्पादन 163.2 लाख टन से बढ़कर 256.8 लाख टन हो गया।

मसालों की खेती बनी किसानों के लिए आकर्षक विकल्प

मसाला उत्पादन में वृद्धि के पीछे घरेलू खपत, निर्यात मांग और बेहतर बाजार मूल्य को प्रमुख कारण माना जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक अजवाइन के उत्पादन में करीब 306%, अदरक में 139%, लहसुन में 121% और सूखी मिर्च के उत्पादन में लगभग 77% की बढ़ोतरी हुई है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि 2023-24 में मसाला क्षेत्र का उत्पादन मूल्य करीब 2,243.7 अरब रुपये रहा। इसमें लहसुन की हिस्सेदारी लगभग 32% रही। इससे संकेत मिलता है कि मसाला क्षेत्र कृषि अर्थव्यवस्था में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

तिलहन उत्पादन में भी मजबूत बढ़ोतरी

पिछले दस वर्षों में तिलहन उत्पादन करीब 70.2% बढ़कर 429.9 लाख टन पहुंच गया। खाद्य तेल की बढ़ती घरेलू मांग और बेहतर कीमतों ने किसानों को तिलहन की ओर आकर्षित किया है। हालांकि सभी तिलहनों में समान वृद्धि नहीं रही और कुछ पारंपरिक फसलों के उत्पादन में कमी भी दर्ज की गई।

दालों का उत्पादन 57% से अधिक बढ़ा

दालों का उत्पादन भी इस अवधि में 57.3% बढ़कर 256.8 लाख टन पहुंच गया। मूंग का उत्पादन करीब 166.4%, चना 57.5% और तुअर में करीब 41.5% की वृद्धि दर्ज की गई। इससे देश में प्रोटीन आधारित खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग और फसल विविधीकरण की तस्वीर सामने आती है।

गेहूं-चावल का दबदबा कायम, लेकिन फसल विविधीकरण तेज

अनाज उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। पिछले दस वर्षों में अनाज उत्पादन करीब 41% बढ़ा, जिसमें मक्का का प्रदर्शन विशेष रूप से मजबूत रहा। इसके बावजूद आर्थिक मूल्य के लिहाज से गेहूं और चावल का महत्व अभी भी बना हुआ है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बदलती उपभोक्ता मांग, बेहतर कीमत, निर्यात के अवसर और घरेलू खाद्य तेल एवं दालों की जरूरत आने वाले वर्षों में किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ उच्च मूल्य वाली फसलों का संतुलन बनाने के लिए प्रेरित कर सकती है।

संवाददाता — श्रवण पंवार
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