Category:
Politics (राजनीति)
State:
Rajasthan
2026-08-28 04:18:27
जयपुर। नगर निगम चुनाव की तैयारियों के बीच जयपुर शहर का राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलता नजर आ रहा है। 150 वार्डों वाले प्रस्तावित नए चुनावी नक्शे में करीब 35 वार्ड ऐसे माने जा रहे हैं, जहां मुस्लिम मतदाता चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की स्थिति में हैं। ऐसे में इन वार्डों में उम्मीदवारों के चयन, टिकट वितरण और मतदान के अंतिम रुझान पर भाजपा-कांग्रेस दोनों की नजर रहेगी।
35 वार्डों में मुस्लिम वोट निर्णायक, टिकट बंटवारे से बदलेगा जयपुर का चुनावी गणित
जयपुर। नगर निगम चुनाव की तैयारियों के बीच जयपुर शहर का राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलता नजर आ रहा है। 150 वार्डों वाले प्रस्तावित नए चुनावी नक्शे में करीब 35 वार्ड ऐसे माने जा रहे हैं, जहां मुस्लिम मतदाता चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की स्थिति में हैं। ऐसे में इन वार्डों में उम्मीदवारों के चयन, टिकट वितरण और मतदान के अंतिम रुझान पर भाजपा-कांग्रेस दोनों की नजर रहेगी।
वार्ड परिसीमन के बाद बदला चुनावी समीकरण
नए परिसीमन में शहर के पुराने इलाकों के साथ नए विकसित क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। हवामहल, किशनपोल, आदर्श नगर और सिविल लाइंस जैसे क्षेत्रों के साथ बाहरी एवं तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में भी राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना है। कई वार्डों की सीमाएं बदलने से पुराने चुनावी आंकड़ों के आधार पर जीत-हार का अनुमान लगाना राजनीतिक दलों के लिए आसान नहीं होगा।
कांग्रेस के लिए मुस्लिम वोट बैंक अहम, भाजपा की भी कड़ी परीक्षा
कांग्रेस के लिए परंपरागत मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन कई वार्डों में महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं भाजपा भी नए परिसीमन वाले क्षेत्रों में संगठन और बूथ स्तर की मजबूती के आधार पर चुनावी बढ़त बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।
सबसे बड़ी चुनौती उन वार्डों में सामने आ सकती है जहां मुस्लिम मतदाता निर्णायक संख्या में हैं। यदि यहां वोटों का ध्रुवीकरण या विभाजन होता है तो उसका सीधा असर दोनों प्रमुख दलों के उम्मीदवारों की संभावनाओं पर पड़ सकता है।
AIMIM और आप जैसे दल बढ़ा सकते हैं मुकाबले की चुनौती
स्थानीय चुनाव में AIMIM, आम आदमी पार्टी अथवा अन्य क्षेत्रीय/स्वतंत्र उम्मीदवारों की सक्रियता भी समीकरण बदल सकती है। खासकर मुस्लिम बहुल या मिश्रित आबादी वाले वार्डों में यदि मजबूत उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं तो पारंपरिक वोटों का बंटवारा चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है।
तीन बच्चों की पाबंदी हटने से बढ़ सकते हैं दावेदार
नगर निकाय चुनाव में तीन बच्चों से संबंधित पात्रता प्रतिबंध हटने के बाद चुनाव लड़ने के इच्छुक दावेदारों की संख्या बढ़ने की संभावना है। इससे प्रमुख दलों के सामने टिकट वितरण बड़ी चुनौती बन सकता है। पुराने पार्षदों, संगठन के सक्रिय कार्यकर्ताओं और नए दावेदारों के बीच टिकट को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज होने के आसार हैं।
टिकट वितरण बनेगा दोनों दलों के लिए अग्निपरीक्षा
चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि किस वार्ड में किस सामाजिक और राजनीतिक समीकरण के उम्मीदवार को मैदान में उतारा जाए। स्थानीय पकड़, संगठन में सक्रियता, व्यक्तिगत जनाधार और वार्ड के बदले हुए समीकरण टिकट चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
फिलहाल जयपुर के नगर निगम चुनाव का मुकाबला केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर तक सीमित नहीं दिख रहा। परिसीमन, मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका, नए राजनीतिक विकल्प और टिकट वितरण—ये चार प्रमुख मुद्दे चुनाव की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकते हैं।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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