Category:
Sports (खेल)
State:
Rajasthan
2026-08-28 04:24:35
जयपुर। राखी का त्योहार भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक है, लेकिन खेल की दुनिया में यही रिश्ते कभी-कभी कड़ी प्रतिस्पर्धा का रूप ले लेते हैं। राजस्थान के कई भाई-बहन ऐसे हैं, जो घर में एक-दूसरे के सबसे बड़े साथी हैं, वहीं मैदान पर जीत के लिए एक-दूसरे को चुनौती भी देते हैं।
🏅 घर में भाई-बहन, मैदान में प्रतिद्वंद्वी; जीत की होड़ ने रिश्ते को बनाया और मजबूत
जयपुर। राखी का त्योहार भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक है, लेकिन खेल की दुनिया में यही रिश्ते कभी-कभी कड़ी प्रतिस्पर्धा का रूप ले लेते हैं। राजस्थान के कई भाई-बहन ऐसे हैं, जो घर में एक-दूसरे के सबसे बड़े साथी हैं, वहीं मैदान पर जीत के लिए एक-दूसरे को चुनौती भी देते हैं।
हैंडबॉल में एकता और विशाल की जोड़ी
एकता और विशाल राठौड़ नेशनल स्तर पर हैंडबॉल खेल चुके हैं। दोनों ने खेल की शुरुआत राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों से की और आज प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। प्रतियोगिता में दोनों एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी हो सकते हैं, लेकिन मैदान के बाहर एक-दूसरे की सफलता के सबसे बड़े समर्थक हैं। राखी पर दोनों के लिए सबसे बड़ी खुशी यही है कि उनका भाई-बहन का रिश्ता खेल की प्रतिस्पर्धा से कहीं मजबूत है।
तीरंदाजी में प्रिया और सचिन ने बनाई अलग पहचान
तीरंदाजी में प्रिया और सचिन चौधरी ने भी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। दोनों ने खेल की शुरुआत साथ की और अब अलग-अलग प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रिया वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक जीत चुकी हैं, जबकि सचिन एशिया कप और यूथ एशियन चैंपियनशिप की टीम का हिस्सा रह चुके हैं। मैदान पर मुकाबला चाहे जितना कड़ा हो, दोनों एक-दूसरे की उपलब्धियों पर गर्व करते हैं।
एथलेटिक्स में गौरव और प्रियंका की राह अलग, लक्ष्य एक
एथलेटिक्स में गौरव और प्रियंका यादव की कहानी भी प्रेरणादायक है। पिता का सपना था कि दोनों बच्चे खेलों में आगे बढ़ें। गौरव 100 और 200 मीटर दौड़ में तैयारी कर रहे हैं और नेशनल एक्सीलेंस सेंटर में प्रशिक्षण ले रहे हैं। वहीं बहन प्रियंका ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पदक हासिल किए हैं। दोनों की खेल विधा अलग है, लेकिन एक-दूसरे को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करते हैं।
बैडमिंटन में व्योम और स्नेहा की पदकों वाली जोड़ी
बैडमिंटन में व्योम और स्नेहा लांबा भी भाई-बहन के खेल जुनून की मिसाल हैं। व्योम अंडर-15 सब-जूनियर नेशनल में स्वर्ण जीत चुके हैं, जबकि स्नेहा राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक हासिल कर चुकी हैं। अब दोनों की नजर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाने पर है।
इन खिलाड़ियों की कहानी बताती है कि खेल का मुकाबला मैदान तक सीमित रह सकता है, रिश्तों में नहीं। जीत की होड़ भाई-बहन के बीच प्रतिस्पर्धा जरूर बढ़ाती है, लेकिन एक-दूसरे का हौसला और समर्थन इस रिश्ते को और मजबूत बनाता है। राखी पर यही खेल भावना भाई-बहन के रिश्ते को नई ऊंचाई देती है।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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