Category:
Agriculture (कृषि)
State:
Rajasthan
2026-08-29 04:42:45
उदयपुर। प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों में डीन और डायरेक्टर जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में विश्वविद्यालय के वरिष्ठता, अनुभव और विषय विशेषज्ञता से जुड़े निर्धारित मानकों को नजरअंदाज कर कनिष्ठ शिक्षकों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
कृषि विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों पर उठे सवाल, वरिष्ठता दरकिनार कर चहेतों को जिम्मेदारी देने के आरोप
उदयपुर। प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों में डीन और डायरेक्टर जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में विश्वविद्यालय के वरिष्ठता, अनुभव और विषय विशेषज्ञता से जुड़े निर्धारित मानकों को नजरअंदाज कर कनिष्ठ शिक्षकों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
मामला महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MPUAT), उदयपुर सहित प्रदेश के अन्य कृषि विश्वविद्यालयों में पदों के आवंटन से जुड़ा बताया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान कृषि कॉलेज में डीन पद के लिए वरिष्ठता सूची में कई प्रोफेसर शामिल थे, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर विवाद सामने आया। इसी तरह डेयरी कॉलेज, होम साइंस कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज और भीलवाड़ा कृषि कॉलेज में भी डीन की जिम्मेदारियां सौंपे जाने को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
वरिष्ठता और योग्यता के मानकों पर बहस
विवाद का मुख्य बिंदु यह है कि विश्वविद्यालय अधिनियम एवं कुलाधिपति के निर्देशों के अनुसार डीन और डायरेक्टर जैसे पदों पर नियुक्ति में वरिष्ठता, अनुभव, योग्यता और संबंधित विषय की विशेषज्ञता को महत्व दिया जाना चाहिए। आरोप लगाने वाले पक्ष का कहना है कि कुछ मामलों में इन मानकों के बजाय अन्य आधारों पर जिम्मेदारियां तय की गईं।
रिपोर्ट में राजस्थान कृषि कॉलेज के अलावा होम साइंस कॉलेज में डॉ. सरला लखावत, इंजीनियरिंग कॉलेज में डॉ. विनोद यादव तथा भीलवाड़ा कृषि कॉलेज में डॉ. के.के. यादव को जिम्मेदारी दिए जाने का उल्लेख है। हालांकि, इन नियुक्तियों की वैधानिकता और प्रक्रिया पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित विश्वविद्यालय के आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।
इंटरव्यू प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
मामले में इंटरव्यू प्रक्रिया को लेकर भी अलग-अलग सवाल सामने आए हैं। रिपोर्ट में कुलपति एवं संबंधित अधिकारियों की ओर से यह कहा गया है कि चयन प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप की गई है। वहीं दूसरी ओर, कुछ शिक्षकों का तर्क है कि यदि चयन पूरी तरह पारदर्शी और निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ है तो वरिष्ठता सूची तथा चयन के आधार को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
कृषि विश्वविद्यालयों में डीन और डायरेक्टर के पद केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा असर शिक्षण व्यवस्था, शोध कार्य, विद्यार्थियों और कृषि विस्तार गतिविधियों पर पड़ता है। ऐसे में नियुक्तियों को लेकर उठे सवालों का पारदर्शी तरीके से समाधान जरूरी माना जा रहा है।
अब निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की ओर हैं कि वे नियुक्तियों के आधार, वरिष्ठता क्रम और नियमों की स्थिति को स्पष्ट करते हैं या नहीं। यदि शिकायतें औपचारिक रूप से दर्ज होती हैं तो स्वतंत्र जांच के जरिए पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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