Category:
Court (न्यायालय)
State:
Rajasthan
2026-08-29 04:48:10
उदयपुर। राजस्थान की न्यायिक व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। प्रदेश की 48 अदालतों को पेपरलेस कोर्ट के रूप में विकसित किया जा रहा है। इनमें 36 एनआई एक्ट और 12 कॉमर्शियल कोर्ट शामिल हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद केस की पेशी से लेकर दस्तावेज प्रस्तुत करने, सुनवाई और ऑर्डरशीट तैयार करने तक की प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाएगा।
राजस्थान की 48 अदालतें होंगी पेपरलेस, 15 सितंबर से डिजिटल सुनवाई व्यवस्था का आगाज
उदयपुर। राजस्थान की न्यायिक व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। प्रदेश की 48 अदालतों को पेपरलेस कोर्ट के रूप में विकसित किया जा रहा है। इनमें 36 एनआई एक्ट और 12 कॉमर्शियल कोर्ट शामिल हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद केस की पेशी से लेकर दस्तावेज प्रस्तुत करने, सुनवाई और ऑर्डरशीट तैयार करने तक की प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार 15 सितंबर के बाद पेपरलेस कोर्ट व्यवस्था शुरू किए जाने की तैयारी है। संबंधित अदालतों में एलईडी स्क्रीन की व्यवस्था की जाएगी, जिस पर वादी-प्रतिवादियों को सुनवाई के लिए केस की तारीख और आवश्यक जानकारी दिखाई जाएगी। जज की कुर्सी के पीछे भी एलईडी स्क्रीन लगाई जाएगी, जिस पर केस से संबंधित तारीख, चिन्हित गवाह, दस्तावेज तथा मामले की प्रगति जैसी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध रहेगी।
वकीलों के लिए दो कंप्यूटर, ऑनलाइन पेश होंगे दस्तावेज
पेपरलेस व्यवस्था में अधिवक्ताओं के लिए अदालत परिसर में दो कंप्यूटर उपलब्ध कराए गए हैं। दोनों पक्ष अपने दस्तावेज ऑनलाइन प्रस्तुत कर सकेंगे। सुनवाई के लिए स्पीकर और माइक्रोफोन की व्यवस्था भी की गई है। इससे कागजी फाइलों के बजाय डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर सुनवाई को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
इस व्यवस्था के लिए ‘न्यायान’ सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाएगा। इसके माध्यम से अदालत में अगली तारीख, दस्तावेज पेश करने, ऑर्डरशीट सहित विभिन्न न्यायिक कार्य डिजिटल तरीके से किए जा सकेंगे। संबंधित केस के दस्तावेज और रिकॉर्ड भी डिजिटल माध्यम से देखे जा सकेंगे।
फाइलों के बोझ से मिलेगी राहत
पेपरलेस कोर्ट व्यवस्था लागू होने से अदालतों में कागजी फाइलों के रखरखाव और उनके आवागमन में कमी आने की उम्मीद है। डिजिटल रिकॉर्ड के कारण दस्तावेजों को खोजने, सुरक्षित रखने और जरूरत के समय तत्काल उपलब्ध कराने में भी सुविधा होगी। न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और कार्यक्षमता बढ़ाने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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