Category:
Politics (राजनीति)
State:
Rajasthan
2026-09-01 02:51:38
जयपुर। जयपुर नगर निगम चुनाव 2026 में टिकट वितरण के साथ ही शहर की वार्ड राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों ने कई वार्डों में पिछले चुनाव में जीत दर्ज कर चुके पार्षदों को दोबारा मौका देने के बजाय नए चेहरों पर दांव लगाया है। इससे लंबे समय से वार्ड स्तर पर सक्रिय नेताओं और पूर्व पार्षदों के बीच असंतोष के साथ-साथ नए दावेदारों में उत्साह भी दिखाई दे रहा है।
जयपुर नगर निगम चुनाव: पुराने चेहरों पर पार्टियों का भरोसा कमजोर, नए प्रत्याशियों से बदले सियासी समीकरण
जयपुर। जयपुर नगर निगम चुनाव 2026 में टिकट वितरण के साथ ही शहर की वार्ड राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों ने कई वार्डों में पिछले चुनाव में जीत दर्ज कर चुके पार्षदों को दोबारा मौका देने के बजाय नए चेहरों पर दांव लगाया है। इससे लंबे समय से वार्ड स्तर पर सक्रिय नेताओं और पूर्व पार्षदों के बीच असंतोष के साथ-साथ नए दावेदारों में उत्साह भी दिखाई दे रहा है।
उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020 में भाजपा के 88 और कांग्रेस के 49 पार्षद चुनाव जीते थे। इनमें से इस बार भाजपा के करीब 14 और कांग्रेस के 5 पुराने विजेता पार्षदों को ही दोबारा टिकट मिला है। यानी कुल 137 पुराने विजेता पार्षदों में से केवल 19 को पुनः मैदान में उतारा गया, जबकि 118 पुराने विजेताओं को टिकट नहीं मिला।
नए परिसीमन ने बदले कई वार्डों के समीकरण
जयपुर नगर निगम के नए परिसीमन के बाद कई वार्डों की सीमाएं, आरक्षण और सामाजिक समीकरण बदले हैं। ऐसे में पिछले चुनाव के प्रदर्शन के आधार पर टिकट देने के बजाय राजनीतिक दल उम्मीदवार की स्थानीय पकड़, संगठन में सक्रियता, क्षेत्र में छवि और चुनाव जीतने की क्षमता को प्राथमिकता देते नजर आ रहे हैं।
भाजपा ने जयपुर के 150 वार्डों में से 145 के प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। सूची में अनुभवी नेताओं के साथ बड़ी संख्या में नए चेहरों को भी मौका दिया गया है। पार्टी ने 52 महिला प्रत्याशियों को मैदान में उतारकर महिला नेतृत्व पर भी खास जोर दिया है।
टिकट कटने से पुराने नेताओं में नाराजगी
टिकट वितरण के बाद कई वार्डों में पार्टी कार्यकर्ताओं और दावेदारों के बीच नाराजगी सामने आ रही है। कुछ स्थानों पर पुराने नेताओं के समर्थक विरोध में उतर आए हैं, जबकि कई दावेदार निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी में बताए जा रहे हैं।
वार्ड नंबर 76 में भाजपा के टिकट को लेकर सामने आया विवाद भी पार्टी के लिए चुनौती बना। यहां टिकट और पार्टी सिंबल को लेकर दो नाम सामने आने से स्थिति पेचीदा हो गई।
पूर्व मेयर को टिकट, निवर्तमान मेयर का पत्ता कटा
भाजपा ने वार्ड 110 से पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल को मैदान में उतारा है, जबकि जयपुर की निवर्तमान मेयर कुसुम यादव को टिकट नहीं दिया गया। वहीं कई वार्डों में पार्टी ने पुराने चेहरों की जगह नए और युवा प्रत्याशियों को मौका दिया है।
अब वार्ड स्तर पर होगी असली परीक्षा
टिकट वितरण के बाद अब दोनों प्रमुख दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बगावत रोकने और नए प्रत्याशियों के पक्ष में संगठन को एकजुट करने की है। नए परिसीमन के कारण कई वार्डों में पुराने राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। ऐसे में इस बार चुनाव में पार्टी के टिकट के साथ-साथ प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़, स्थानीय मुद्दे और मतदाताओं से संपर्क निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
जयपुर में सड़क, सफाई, सीवर, पेयजल, ट्रैफिक, पार्क और स्थानीय विकास जैसे मुद्दे चुनावी चर्चा के केंद्र में रहने की संभावना है। अब देखना होगा कि पुराने चेहरों को हटाकर नए प्रत्याशियों पर लगाया गया राजनीतिक दांव मतदाताओं के बीच कितना असर पैदा करता है।
संवाददाता – श्रवण पंवार, जयपुर
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