Category:
Politics (राजनीति)
State:
Rajasthan
2026-09-01 03:05:46
जयपुर। जयपुर नगर निगम चुनाव 2026 में भाजपा की प्रत्याशी सूची जारी होने के बाद वार्ड नंबर 76 का टिकट विवाद पार्टी के भीतर चल रहे शक्ति-संतुलन को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। पार्टी की सूची में पूर्व उप महापौर पुनीत कर्णावट का नाम शामिल किया गया, लेकिन नामांकन के दौरान भाजपा का अधिकृत सिंबल कुलदीप मिश्रा को दिए जाने से स्थिति उलझ गई।
टिकट की सूची में नाम, लेकिन सिंबल पर सियासी घमासान: जयपुर भाजपा में वार्ड 76 का विवाद चर्चा में
जयपुर। जयपुर नगर निगम चुनाव 2026 में भाजपा की प्रत्याशी सूची जारी होने के बाद वार्ड नंबर 76 का टिकट विवाद पार्टी के भीतर चल रहे शक्ति-संतुलन को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। पार्टी की सूची में पूर्व उप महापौर पुनीत कर्णावट का नाम शामिल किया गया, लेकिन नामांकन के दौरान भाजपा का अधिकृत सिंबल कुलदीप मिश्रा को दिए जाने से स्थिति उलझ गई।
मामला तब और पेचीदा हो गया जब मालवीय नगर विधायक कालीचरण सराफ की ओर से कुलदीप मिश्रा को सिंबल दिए जाने की बात सामने आई। बताया गया कि प्रत्याशी बदलने से पहले ही मिश्रा को पार्टी का सिंबल मिल चुका था। इसके बाद कर्णावट के नाम को लेकर पार्टी संगठन और स्थानीय नेतृत्व के बीच मतभेद की चर्चा तेज हो गई। नामांकन के अंतिम दिन भाजपा की ओर से कर्णावट के पक्ष में नया सिंबल और अधिकृत दस्तावेज जारी किए जाने की जानकारी भी सामने आई।
कुसुम यादव का टिकट कटा, सुनील कोठारी को मौका
जयपुर की निवर्तमान महापौर कुसुम यादव को इस बार भाजपा ने टिकट नहीं दिया। वार्ड नंबर 112 से उनकी जगह पूर्व भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील कोठारी को प्रत्याशी बनाया गया है। कुसुम यादव को टिकट नहीं मिलना भाजपा के टिकट वितरण के सबसे चर्चित फैसलों में शामिल रहा।
वहीं, पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल को वार्ड नंबर 110 से टिकट दिया गया है। भाजपा ने जयपुर के 150 वार्डों में से 145 के लिए प्रत्याशी घोषित किए हैं।
टिकट से ज्यादा महत्वपूर्ण हुआ पार्टी सिंबल
वार्ड 76 का घटनाक्रम यह बताता है कि चुनाव में पार्टी की सूची में नाम होना और नामांकन के समय अधिकृत चुनाव चिह्न मिलना कितना महत्वपूर्ण है। अंतिम दिन तक उम्मीदवारों और समर्थकों में असमंजस की स्थिति बनी रही। इसी तरह वार्ड 101 में भी भाजपा प्रत्याशी और सिंबल को लेकर विवाद सामने आया।
अब संगठन के सामने बगावत रोकने की चुनौती
टिकट वितरण के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने असंतुष्ट दावेदारों को संभालना बड़ी चुनौती बन गया है। कई वार्डों में पुराने दावेदार टिकट नहीं मिलने से नाराज हैं, जबकि कुछ जगह निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी भी सामने आई है। नामांकन के अंतिम दिन दोनों प्रमुख दलों में टिकट और सिंबल को लेकर रही खींचतान ने चुनावी मुकाबले को और रोचक बना दिया है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि कौन-सा प्रत्याशी पार्टी के अधिकृत सिंबल के साथ मैदान में कायम रहता है और कौन बागी तेवर के साथ चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाता है। जयपुर के बदले परिसीमन और नए वार्ड समीकरणों के बीच व्यक्तिगत जनाधार भी इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
संवाददाता – श्रवण पंवार, जयपुर
NMS.NEWS — नवधृति मानवाधिकार समाचार