Category:
Politics (राजनीति)
State:
Rajasthan
2026-09-03 02:59:24
जयपुर। नगर निकाय चुनाव में टिकट वितरण के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के सामने बागी उम्मीदवारों को साधने की चुनौती खड़ी हो गई है। नाम वापसी की अंतिम प्रक्रिया से पहले पार्टी संगठन और स्थानीय नेता अपने-अपने असंतुष्ट प्रत्याशियों को मनाने में जुटे हैं। कई वार्डों में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने उन्हीं के दल से जुड़े उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से मुकाबला रोचक होने के आसार हैं।
जयपुर चुनाव में टिकट के बाद बगावत का सियासी पेंच, नाम वापसी से पहले अपनों को मनाने में जुटे दल
जयपुर। नगर निकाय चुनाव में टिकट वितरण के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के सामने बागी उम्मीदवारों को साधने की चुनौती खड़ी हो गई है। नाम वापसी की अंतिम प्रक्रिया से पहले पार्टी संगठन और स्थानीय नेता अपने-अपने असंतुष्ट प्रत्याशियों को मनाने में जुटे हैं। कई वार्डों में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने उन्हीं के दल से जुड़े उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से मुकाबला रोचक होने के आसार हैं।
कहीं चाय पर चर्चा, कहीं मनाने के लिए कसम का सहारा
टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदारों को मनाने के लिए नेताओं की ओर से व्यक्तिगत संपर्क किया जा रहा है। कहीं चाय पर बैठकर समझाइश दी जा रही है तो कहीं पुराने राजनीतिक संबंधों और भविष्य की जिम्मेदारियों का हवाला देकर चुनाव मैदान से हटने की अपील की जा रही है। हालांकि कुछ बागी प्रत्याशी फिलहाल पीछे हटने के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं।
35 वार्डों में अपनों से ही मुकाबले की आशंका
टिकट वितरण के बाद करीब 35 वार्डों में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने अपने ही खेमे के दावेदारों के चुनाव लड़ने की स्थिति बनने की बात सामने आ रही है। ऐसे में नाम वापसी से पहले दोनों प्रमुख दलों के संगठन के लिए डैमेज कंट्रोल सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
भाजपा में संगठन सक्रिय, कांग्रेस में भी चल रही मान-मनुहार
भाजपा में संघ और संगठन स्तर पर बागी दावेदारों से संपर्क कर उन्हें समझाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं कांग्रेस में विधायक, जिलाध्यक्ष और स्थानीय पदाधिकारी नाराज प्रत्याशियों से बातचीत कर रहे हैं। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि अधिकृत उम्मीदवार के सामने वोटों का विभाजन न हो और चुनावी समीकरण कमजोर न पड़ें।
बागियों का दो टूक जवाब—चुनाव बाद मिलेंगे
कई नाराज दावेदारों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय से संगठन के लिए काम किया, लेकिन टिकट वितरण में उनकी अनदेखी हुई। ऐसे प्रत्याशी फिलहाल चुनाव मैदान से हटने को तैयार नहीं हैं। कुछ बागी नेताओं का कहना है कि “अभी चुनाव मैदान में हैं, बातचीत चुनाव के बाद होगी।”
नाम वापसी के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी कि कितने बागी प्रत्याशी मैदान में टिकते हैं और कितने पार्टी नेताओं की मान-मनुहार के बाद अपना नाम वापस लेते हैं। फिलहाल टिकट वितरण के बाद शुरू हुई अंदरूनी खींचतान ने जयपुर के चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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