Category:
Politics (राजनीति)
State:
Rajasthan
2026-09-04 03:56:11
जयपुर। नगरीय निकाय चुनाव की तस्वीर अब साफ होने लगी है। नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रदेश के 41 जिलों के 10,245 वार्डों में कुल 38,891 प्रत्याशी चुनावी मैदान में रह गए हैं। पिछले निकाय चुनाव में 196 निकायों के लिए करीब 27 हजार प्रत्याशी मैदान में थे। इस बार प्रत्याशियों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
हर वार्ड में त्रिकोणीय समीकरण, 38,891 प्रत्याशी मैदान में; 77 पार्षद निर्विरोध चुने गए
जयपुर। नगरीय निकाय चुनाव की तस्वीर अब साफ होने लगी है। नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रदेश के 41 जिलों के 10,245 वार्डों में कुल 38,891 प्रत्याशी चुनावी मैदान में रह गए हैं। पिछले निकाय चुनाव में 196 निकायों के लिए करीब 27 हजार प्रत्याशी मैदान में थे। इस बार प्रत्याशियों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
नामांकन प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में आवेदन सामने आए। 17,137 नामांकन पत्र तकनीकी खामियों के चलते निरस्त किए गए, जबकि राजनीतिक दलों की ओर से डैमेज कंट्रोल और बागियों को मनाने की कोशिशों के बीच 10,112 प्रत्याशियों ने अपने नाम वापस ले लिए। इसके बाद अब अंतिम रूप से 38,891 प्रत्याशी चुनावी मुकाबले में हैं।
कई वार्डों में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार
प्रत्याशियों की अंतिम सूची सामने आने के साथ ही अधिकांश वार्डों में मुकाबले के समीकरण भी स्पष्ट होने लगे हैं। भाजपा-कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के साथ निर्दलीय और बागी प्रत्याशियों की मौजूदगी ने कई वार्डों में मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए अपने अधिकृत प्रत्याशी के पक्ष में वोटों का ध्रुवीकरण बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।
77 पार्षद निर्विरोध चुने गए
नाम वापसी के बाद प्रदेश के विभिन्न निकायों में 77 पार्षद निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। वहीं कुछ निकायों में प्रत्याशियों की संख्या काफी अधिक होने से चुनावी मुकाबला बेहद रोचक नजर आ रहा है।
5 बड़े निकायों में भी कड़ा मुकाबला
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार कोटपूतली, भरतपुर, जोधपुर, बीकानेर और कोटा जैसे प्रमुख नगर निकायों में भी बड़ी संख्या में प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। कई वार्डों में उम्मीदवारों की संख्या अधिक होने के कारण स्थानीय समीकरण, पार्टी संगठन और प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़ चुनाव परिणाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
अब प्रचार अभियान पर पूरा फोकस
नाम वापसी की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद अब राजनीतिक दल और प्रत्याशी चुनाव प्रचार को गति देने में जुटेंगे। टिकट नहीं मिलने से नाराज नेताओं और बागी प्रत्याशियों को साधने की कोशिशों के साथ-साथ प्रत्येक वार्ड में बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने की रणनीति पर जोर रहेगा। आने वाले दिनों में प्रत्याशियों का जनसंपर्क, स्थानीय मुद्दे और मतदाताओं का रुझान चुनावी तस्वीर को और स्पष्ट करेंगे।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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