Category:
Religion (धर्म)
State:
Rajasthan
2026-09-04 04:15:56
पाली/घाणेराव। भक्ति आंदोलन की महान संत मीरा बाई की कृष्ण भक्ति से जुड़ी एक प्राचीन कृष्ण प्रतिमा आज भी पाली जिले के घाणेराव महल में सुरक्षित है। करीब 500 वर्ष पुरानी और लगभग 14 इंच की इस प्रतिमा को लेकर मान्यता है कि मीरा बाई ने बाल्यावस्था में इसे अपना आराध्य और पति माना था। जन्माष्टमी के विशेष अवसर पर इस ऐतिहासिक प्रतिमा के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
Paliघाणेराव महल में आज भी विराजित है 500 साल पुरानी कृष्ण प्रतिमा
जिस श्रीकृष्ण को मीरा ने माना था अपना पति, अब पहली बार श्रद्धालुओं के लिए खुले दर्शन के द्वार
पाली/घाणेराव। भक्ति आंदोलन की महान संत मीरा बाई की कृष्ण भक्ति से जुड़ी एक प्राचीन कृष्ण प्रतिमा आज भी पाली जिले के घाणेराव महल में सुरक्षित है। करीब 500 वर्ष पुरानी और लगभग 14 इंच की इस प्रतिमा को लेकर मान्यता है कि मीरा बाई ने बाल्यावस्था में इसे अपना आराध्य और पति माना था। जन्माष्टमी के विशेष अवसर पर इस ऐतिहासिक प्रतिमा के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
घाणेराव की पूर्व ठकुरानी एवं इतिहासकार सरिता कुमारी के अनुसार, मीरा और श्रीकृष्ण की भक्ति से जुड़ी यह प्रतिमा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि राजस्थान के इतिहास और भक्ति परंपरा की महत्वपूर्ण धरोहर भी है। बताया जाता है कि बाल्यावस्था में मीरा ने एक विवाह समारोह देखा और अपनी मां से पूछा कि पति कौन होगा। मां ने श्रीकृष्ण की प्रतिमा की ओर संकेत करते हुए उसे ही उनका पति बताया। इसी प्रसंग ने मीरा की कृष्ण भक्ति को जीवनभर के लिए एक गहरी दिशा दी।
इतिहास के अनुसार मीरा का विवाह मेवाड़ के राजकुमार कुंवर भोजराज से हुआ था। पति के निधन के बाद भी मीरा ने सांसारिक जीवन के बजाय श्रीकृष्ण की भक्ति को ही अपना जीवन समर्पित किया। उनके पदों और भजनों में कृष्ण के प्रति प्रेम, समर्पण और विरह की भावना स्पष्ट दिखाई देती है।
बताया जाता है कि वृंदावन की ओर प्रस्थान करने से पहले मीरा ने इस प्रतिमा को अपने परिवार के सदस्य ठाकुर प्रतापसिंह को सौंप दिया था। इसके बाद प्रतिमा अलग-अलग स्थानों से होते हुए 1928 में नाडोल और फिर घाणेराव पहुंची। घाणेराव महल की जनाना ड्योढ़ी स्थित मंदिर में प्रतिमा की स्थापना की गई, जहां आज भी श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की परंपरा जारी है।
भक्ति, इतिहास और विरासत का अनूठा संगम
यह कृष्ण प्रतिमा राजस्थान की उस समृद्ध विरासत की याद दिलाती है, जिसमें इतिहास और आध्यात्मिक परंपराएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। मीरा बाई की कृष्ण भक्ति से जुड़ी इस धरोहर को देखने के लिए श्रद्धालुओं और इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों में विशेष उत्सुकता रहती है।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
NMS.NEWS — नवधृति मानवाधिकार समाचार