Category:
Politics (राजनीति)
State:
Rajasthan
2026-09-06 06:08:30
जयपुर। राजस्थान में आगामी नगर निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के साथ निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी मुकाबले को रोचक बना दिया है। प्रदेश के 10,230 वार्डों में कुल 38,889 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें 18,732 निर्दलीय प्रत्याशी हैं, जो कुल उम्मीदवारों का करीब 48.16 प्रतिशत है। ऐसे में लगभग हर दूसरे वार्ड में निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी समीकरण प्रभावित करते नजर आ रहे हैं।
नगर निकाय चुनाव में निर्दलीयों का दम, 48% प्रत्याशी मैदान में; कई निकायों में सत्ता की चाबी इनके हाथ
जयपुर। राजस्थान में आगामी नगर निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के साथ निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी मुकाबले को रोचक बना दिया है। प्रदेश के 10,230 वार्डों में कुल 38,889 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें 18,732 निर्दलीय प्रत्याशी हैं, जो कुल उम्मीदवारों का करीब 48.16 प्रतिशत है। ऐसे में लगभग हर दूसरे वार्ड में निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी समीकरण प्रभावित करते नजर आ रहे हैं।
पिछले चुनाव में 1,615 निर्दलीयों ने दर्ज की थी जीत
पिछले नगर निकाय चुनाव में 1,615 निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल कर कई निकायों में अध्यक्ष और सभापति के चुनाव की तस्वीर बदल दी थी। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार भी निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर उन वार्डों में, जहां भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला करीबी है, वहां निर्दलीय उम्मीदवार परिणाम का रुख बदल सकते हैं।
भाजपा-कांग्रेस के मुकाबले में तीसरी ताकत
आंकड़ों के अनुसार इस बार भाजपा के करीब 9,290, कांग्रेस के 9,027, आरएलपी के 948 और बसपा के 298 प्रत्याशी मैदान में हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में स्थानीय स्तर पर अपनी पकड़ रखने वाले निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक छोटे नगर निकायों और कस्बों में पार्टी के चुनाव चिह्न से अधिक व्यक्तिगत संपर्क, स्थानीय छवि और मतदाताओं से सीधा जुड़ाव निर्णायक भूमिका निभा सकता है। ऐसे में निर्दलीय प्रत्याशियों को नजरअंदाज करना प्रमुख दलों के लिए आसान नहीं होगा।
मेयर-सभापति की कुर्सी पर भी पड़ेगा असर
नगर निकाय चुनाव में वार्ड पार्षदों की जीत के बाद बोर्ड गठन में निर्दलीय पार्षदों की संख्या महत्वपूर्ण हो सकती है। बहुमत से दूर रहने वाली पार्टियों को बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन लेना पड़ सकता है। यही वजह है कि इस बार निर्दलीय प्रत्याशियों को ‘किंगमेकर’ के रूप में देखा जा रहा है।
चुनाव परिणाम आने के बाद किस दल को बहुमत मिलता है और कितने निर्दलीय पार्षद निर्णायक भूमिका में आते हैं, यह तस्वीर साफ होने पर ही नगर निकायों में सत्ता का वास्तविक समीकरण सामने आएगा।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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