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Delhi
2026-09-06 06:10:48
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा सेंटर उद्योग तेजी से विस्तार की ओर बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग की क्षमता बढ़ाने के लिए देश में बड़े पैमाने पर नए डेटा सेंटर स्थापित किए जाने की संभावना है।
भारत में तेजी से बढ़ रहा डेटा सेंटर उद्योग, बिजली-पानी और जमीन की जरूरत बनेगी बड़ी चुनौती
जयपुर | संवाददाता श्रवण पंवार
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा सेंटर उद्योग तेजी से विस्तार की ओर बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग की क्षमता बढ़ाने के लिए देश में बड़े पैमाने पर नए डेटा सेंटर स्थापित किए जाने की संभावना है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाने के लिए करीब 8 से 10 लाख करोड़ रुपये तक के निवेश की जरूरत पड़ सकती है। इस विस्तार के साथ बिजली, पानी और जमीन की मांग भी कई गुना बढ़ने का अनुमान है।
5 साल में बिजली की मांग 7 गुना बढ़ने का अनुमान
डेटा सेंटर लगातार 24 घंटे संचालित होते हैं और इनके लिए बड़ी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है। अनुमान है कि 2030 तक डेटा सेंटरों की बिजली खपत वर्तमान स्तर की तुलना में करीब 7 गुना तक बढ़ सकती है। इसके लिए नए पावर इंफ्रास्ट्रक्चर और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति की जरूरत होगी।
पानी की खपत भी बनेगी महत्वपूर्ण मुद्दा
डेटा सेंटरों में सर्वर को ठंडा रखने के लिए कूलिंग सिस्टम का इस्तेमाल होता है। इसके चलते पानी की आवश्यकता भी बढ़ेगी। बढ़ती क्षमता के साथ हर दिन करोड़ों लीटर पानी की जरूरत पड़ने की संभावना जताई गई है। ऐसे में जल संरक्षण और वैकल्पिक कूलिंग तकनीक पर भी कंपनियों को ध्यान देना होगा।
5 करोड़ वर्गफुट तक जमीन की जरूरत
डेटा सेंटरों के विस्तार के लिए बड़े भू-भाग की आवश्यकता होगी। अनुमान के मुताबिक आने वाले वर्षों में करीब 5 करोड़ वर्गफुट जमीन की जरूरत पड़ सकती है। समुद्र के नजदीक और बड़े शहरों के आसपास डेटा सेंटर विकसित करने की होड़ बढ़ सकती है, जहां बेहतर कनेक्टिविटी, बिजली और फाइबर नेटवर्क उपलब्ध हैं।
निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर भी
डेटा सेंटर क्षेत्र में बड़े निवेश से निर्माण, बिजली, नेटवर्किंग, साइबर सुरक्षा, सर्वर प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स और तकनीकी सेवाओं में रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि विशेषज्ञों के मुताबिक यह क्षेत्र अत्यधिक तकनीकी होने के कारण स्थायी रोजगार की तुलना में उच्च-कौशल वाली नौकरियों की मांग अधिक पैदा करेगा।
सरकारों के सामने नई चुनौती
डेटा सेंटर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई राज्य बिजली शुल्क, जमीन, स्टांप ड्यूटी और अन्य सुविधाओं में रियायतें दे रहे हैं। लेकिन तेजी से बढ़ते डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ बिजली की उपलब्धता, पानी का प्रबंधन, भूमि उपयोग और पर्यावरणीय प्रभाव बड़ी नीतिगत चुनौतियां भी बन सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के डिजिटल भविष्य के लिए डेटा सेंटर जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बन चुके हैं, लेकिन इनके विस्तार की योजना ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखकर बनानी होगी।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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