Category:
Politics (राजनीति)
State:
Delhi
2026-09-06 06:11:27
आने वाले चुनावों में राजनीतिक दलों की रणनीति अब केवल पारंपरिक कार्यकर्ताओं, रैलियों और पोस्टरों तक सीमित नहीं रहने वाली है। स्थानीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और कंटेंट क्रिएटर भी चुनावी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते दिखाई दे रहे हैं। छोटे शहरों और कस्बों में इनकी स्थानीय पकड़ राजनीतिक दलों के लिए खास मायने रखती है।
नया चुनावी समीकरण: सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बने राजनीतिक दलों की नई ताकत, कार्यकर्ता के बराबर कंटेंट क्रिएटर
जयपुर | संवाददाता श्रवण पंवार | NMS.NEWS
आने वाले चुनावों में राजनीतिक दलों की रणनीति अब केवल पारंपरिक कार्यकर्ताओं, रैलियों और पोस्टरों तक सीमित नहीं रहने वाली है। स्थानीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और कंटेंट क्रिएटर भी चुनावी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते दिखाई दे रहे हैं। छोटे शहरों और कस्बों में इनकी स्थानीय पकड़ राजनीतिक दलों के लिए खास मायने रखती है।
15 से 50 हजार फॉलोअर्स वाले इन्फ्लुएंसर भी रडार पर
स्थानीय स्तर पर सक्रिय कई कंटेंट क्रिएटर अब राजनीतिक दलों की नजर में हैं। ऐसे क्रिएटर अपने क्षेत्र के मुद्दों, स्थानीय समस्याओं और जनभावनाओं को वीडियो के जरिए बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचा रहे हैं। खास बात यह है कि इनके दर्शक किसी पार्टी के बजाय स्थानीय चेहरे और मुद्दों से सीधे जुड़ते हैं।
रील से पोस्ट तक बना नया चुनावी मॉडल
राजनीतिक संचार में रील, शॉर्ट वीडियो, लाइव प्रसारण और डिजिटल पोस्ट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। कुछ मामलों में छोटे इन्फ्लुएंसर भी अपने सीमित लेकिन स्थानीय प्रभाव के कारण बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म से ज्यादा प्रभावी साबित हो सकते हैं। यही वजह है कि चुनावी रणनीतिकार अब बूथ स्तर के कार्यकर्ता के साथ डिजिटल नेटवर्क को भी अभियान की अहम कड़ी मान रहे हैं।
सरकार ने डिजिटल विज्ञापन के लिए बनाए नियम
डिजिटल मीडिया और इन्फ्लुएंसर के बढ़ते प्रभाव के साथ चुनावी विज्ञापन को लेकर नियमों और पारदर्शिता पर भी जोर बढ़ा है। राजनीतिक प्रचार में पेड कंटेंट, विज्ञापन और प्रायोजित सामग्री की स्पष्ट पहचान जरूरी मानी जा रही है, ताकि मतदाताओं तक पहुंचने वाले संदेश की प्रकृति साफ रहे।
कार्यकर्ता की जगह नहीं, लेकिन भूमिका जरूर बदल रही
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार सोशल मीडिया की पहुंच बढ़ने के बावजूद चुनाव में जमीनी कार्यकर्ता की भूमिका खत्म नहीं होगी। कंटेंट क्रिएटर मतदाता तक संदेश पहुंचा सकता है, लेकिन मतदाता को बूथ तक लाने और स्थानीय स्तर पर संगठन खड़ा करने में पारंपरिक कार्यकर्ता की भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण रहेगी।
आने वाले चुनावों में दिखेगा डिजिटल असर
आगामी चुनावों में राजनीतिक दलों के लिए चुनौती यह होगी कि डिजिटल प्रचार और जमीनी संगठन के बीच बेहतर तालमेल कैसे बनाया जाए। स्थानीय मुद्दों पर मजबूत पकड़ रखने वाले इन्फ्लुएंसर, माइक्रो-इन्फ्लुएंसर और डिजिटल कार्यकर्ता अब चुनावी रणनीति का नया चेहरा बन सकते हैं।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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