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Category: Politics (राजनीति)    State: Rajasthan

2026-09-09 03:35:05

जयपुर। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव-2026 में सामने आए प्रत्याशी आंकड़ों ने प्रदेश के सामाजिक एवं राजनीतिक समीकरणों की तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट कर दी है। नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाओं में कुल 38,929 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) सबसे बड़ा सामाजिक समूह बनकर सामने आया है।

राजस्थान निकाय चुनाव में OBC का दबदबा, हर दो में से एक उम्मीदवार इसी वर्ग से

प्रदेश में OBC वर्ग के 46.7% प्रत्याशी, सामान्य वर्ग 27% पर; पुरुष प्रत्याशियों की हिस्सेदारी 64.3%

जयपुर। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव-2026 में सामने आए प्रत्याशी आंकड़ों ने प्रदेश के सामाजिक एवं राजनीतिक समीकरणों की तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट कर दी है। नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाओं में कुल 38,929 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) सबसे बड़ा सामाजिक समूह बनकर सामने आया है।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक कुल प्रत्याशियों में 18,184 OBC वर्ग से हैं, जो करीब 46.7 प्रतिशत है। यानी चुनाव मैदान में उतरने वाले लगभग हर दो प्रत्याशियों में से एक OBC वर्ग से संबंधित है। वहीं सामान्य वर्ग के 10,491 प्रत्याशी हैं, जिनकी हिस्सेदारी करीब 27 प्रतिशत है। अनुसूचित जाति (SC) के 8,583 प्रत्याशी करीब 22 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति (ST) के 1,669 प्रत्याशी करीब 4.3 प्रतिशत हैं।

महिला प्रत्याशियों की तुलना में पुरुषों की संख्या अधिक

चुनाव मैदान में कुल 25,036 पुरुष और 13,891 महिला प्रत्याशी हैं। आंकड़ों के अनुसार पुरुष प्रत्याशियों की हिस्सेदारी 64.3 प्रतिशत, जबकि महिलाओं की हिस्सेदारी 35.7 प्रतिशत है। यानी प्रत्येक 100 प्रत्याशियों में लगभग 64 पुरुष और 36 महिलाएं चुनावी मैदान में हैं।

झुंझुनूं, कोटपूतली-बहरोड़ और सीकर में OBC प्रत्याशियों की बड़ी संख्या

जिला-वार आंकड़ों में कई जिलों में OBC प्रत्याशियों की संख्या उल्लेखनीय दिखाई देती है। झुंझुनूं में 1,366, कोटपूतली-बहरोड़ में 1,145, सीकर में 964 और चूरू में 876 OBC प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इन आंकड़ों से संबंधित जिलों के नगरीय चुनावों में OBC वर्ग की मजबूत भागीदारी का संकेत मिलता है।

राजनीतिक जानकारों के लिए ये आंकड़े इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि प्रत्याशियों की सामाजिक संरचना चुनावी रणनीतियों, टिकट वितरण और स्थानीय स्तर पर मतदाताओं के समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि चुनाव परिणाम आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रत्याशियों की संख्या का वास्तविक राजनीतिक प्रभाव कितना रहा।

संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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