Category:
Business (व्यापार)
State:
Delhi
2026-10-01 03:26:17
नई दिल्ली/जयपुर। पश्चिम एशिया में ऊर्जा आपूर्ति मार्गों को लेकर बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत और खाड़ी क्षेत्र के बीच समुद्री ऊर्जा कनेक्टिविटी को लेकर चर्चाएं सामने आई हैं। एक रिपोर्ट में भारत और यूएई के बीच समुद्र के रास्ते तेल-गैस पाइपलाइन की संभावनाओं का उल्लेख किया गया था। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य समुद्री परिवहन मार्गों पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा आपूर्ति को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में विकल्प तलाशना बताया गया।
भारत-यूएई समुद्री ऊर्जा पाइपलाइन की चर्चा, लेकिन सरकार ने परियोजना पर स्थिति स्पष्ट की
नई दिल्ली/जयपुर। पश्चिम एशिया में ऊर्जा आपूर्ति मार्गों को लेकर बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत और खाड़ी क्षेत्र के बीच समुद्री ऊर्जा कनेक्टिविटी को लेकर चर्चाएं सामने आई हैं। एक रिपोर्ट में भारत और यूएई के बीच समुद्र के रास्ते तेल-गैस पाइपलाइन की संभावनाओं का उल्लेख किया गया था। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य समुद्री परिवहन मार्गों पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा आपूर्ति को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में विकल्प तलाशना बताया गया।
हालांकि, इस मामले में भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने जून 2026 में स्पष्ट किया था कि गुजरात को ओमान या अन्य खाड़ी देशों से जोड़ने वाली किसी ‘मिडिल ईस्ट-इंडिया डीपवॉटर पाइपलाइन’ पर मंत्रालय के स्तर पर उस समय कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं था और न ही ओमान या अन्य खाड़ी देशों के साथ ऐसी परियोजना को लेकर सक्रिय बातचीत चल रही थी।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए वैकल्पिक मार्गों पर जोर
हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में तेल आपूर्ति मार्गों में व्यवधान ने भारत सहित कई देशों के सामने ऊर्जा सुरक्षा और परिवहन मार्गों में विविधता लाने की जरूरत को फिर रेखांकित किया है। सितंबर 2026 में खाड़ी क्षेत्र से तेल की वैकल्पिक शिपमेंट व्यवस्था में भी बदलाव देखने को मिला है।
भारत ने यूएई के साथ रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और एलपीजी आपूर्ति के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी समझौते किए हैं। मई 2026 में भारत और यूएई के बीच रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों में कच्चे तेल के संभावित भंडारण तथा एलपीजी आपूर्ति से जुड़े सहयोग की घोषणा हुई थी।
विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य में भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कनेक्टिविटी के तहत समुद्री, रेल, ऊर्जा और डिजिटल नेटवर्क का विस्तार क्षेत्रीय व्यापार तथा ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि किसी भी नई समुद्री पाइपलाइन परियोजना की वास्तविक स्थिति सरकारी मंजूरी, तकनीकी व्यवहार्यता, लागत और संबंधित देशों के बीच औपचारिक समझौते पर निर्भर करेगी।
संवाददाता श्रवण पंवार
जयपुर | NMS.NEWS