Category:
National News (राष्ट्रीय समाचार)
State:
Delhi
2026-08-15 02:06:56
जनगणना 2027 में जातियों की भी होगी गणना, डिजिटल तरीके से जुटेगा देश का नया आंकड़ा
नई दिल्ली। भारत की आगामी जनगणना-2027 इस बार कई मायनों में महत्वपूर्ण होने जा रही है। केंद्र सरकार ने तय किया है कि जनसंख्या गणना के दूसरे चरण में जातियों की भी गणना की जाएगी। यह जानकारी केंद्र सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से दी गई है।
जनगणना 2027 को दो चरणों में पूरा किया जा रहा है। पहले चरण में मकान सूचीकरण एवं आवास गणना होगी, जबकि दूसरे चरण में देश की आबादी से संबंधित विस्तृत जानकारी दर्ज की जाएगी। पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की सुविधा के अनुसार 30 दिनों की अवधि में आयोजित किया जा रहा है।
दूसरे चरण की जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में निर्धारित है। हालांकि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के साथ जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बर्फीले गैर-समकालिक क्षेत्रों में यह चरण सितंबर 2026 में कराया जाएगा। इसी दूसरे चरण में जातियों की गणना भी शामिल होगी।
पहली बार डिजिटल जनगणना
जनगणना-2027 की एक बड़ी खासियत यह भी है कि इसे पहली बार पूरी तरह डिजिटल माध्यम से कराया जाएगा। गणनाकर्मियों द्वारा मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से आंकड़े दर्ज किए जाएंगे। नागरिकों को घर-घर गणना से पहले Self-Enumeration यानी स्वयं जानकारी दर्ज करने का विकल्प भी दिया गया है।
सरकार के अनुसार जनगणना के लिए देशभर में 30 लाख से अधिक गणनाकर्मी, पर्यवेक्षक और अन्य अधिकारी इस विशाल अभियान से जुड़े होंगे। केंद्र सरकार ने जनगणना-2027 के लिए ₹11,718.24 करोड़ के वित्तीय परिव्यय को मंजूरी दी है।
जातिगत आंकड़ों का महत्व
जातियों की गणना से देश में विभिन्न सामाजिक समूहों की संख्या और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से संबंधित आंकड़ों का व्यापक आधार तैयार होने की उम्मीद है। इन आंकड़ों का उपयोग भविष्य में नीतियां और कल्याणकारी योजनाएं तैयार करने में किया जा सकता है।
हालांकि जाति संबंधी प्रश्नों की अंतिम प्रश्नावली और विस्तृत प्रक्रिया को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अधिसूचित किया जाना है। इसलिए फिलहाल किसी विशेष जाति की संभावित संख्या या प्रतिशत को लेकर अनुमान को आधिकारिक आंकड़ा मानना उचित नहीं होगा।
जनगणना-2027 का यह चरण देश के सामाजिक और जनसांख्यिकीय आंकड़ों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पहली बार डिजिटल तकनीक और जातिगत गणना का संयोजन इसे पिछली जनगणनाओं से अलग बनाता है।
संवाददाता: श्रवण पंवार
जयपुर | NMS.NEWS