Category:
Politics (राजनीति)
State:
Rajasthan
2026-08-26 02:51:00
जयपुर। आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों में टिकट की दावेदारी तेज होती जा रही है। खास तौर पर 55 से 65 वर्ष की आयु के वरिष्ठ नेताओं की दावेदारी ने भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। सामने आई जानकारी के अनुसार करीब 235 वरिष्ठ दावेदार टिकट की उम्मीद लगाए हुए हैं, जिनमें लगभग 165 भाजपा और 70 कांग्रेस से जुड़े दावेदार बताए जा रहे हैं।
🗳️ आखिरी मौका मांग रहे वरिष्ठ दावेदार, परिवार के लिए रास्ता छोड़ने की तैयारी—भाजपा-कांग्रेस में बढ़ी टिकट की टेंशन
जयपुर। आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों में टिकट की दावेदारी तेज होती जा रही है। खास तौर पर 55 से 65 वर्ष की आयु के वरिष्ठ नेताओं की दावेदारी ने भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। सामने आई जानकारी के अनुसार करीब 235 वरिष्ठ दावेदार टिकट की उम्मीद लगाए हुए हैं, जिनमें लगभग 165 भाजपा और 70 कांग्रेस से जुड़े दावेदार बताए जा रहे हैं।
इन वरिष्ठ नेताओं का तर्क है कि उन्होंने लंबे समय से पार्टी के लिए संगठनात्मक और राजनीतिक स्तर पर काम किया है। ऐसे में उन्हें एक आखिरी बार चुनाव मैदान में उतरने का अवसर दिया जाना चाहिए। कई दावेदारों का यह भी संकेत है कि यदि इस बार टिकट नहीं मिला तो वे आगे अपने परिवार की नई पीढ़ी को राजनीति में आगे बढ़ाने का विकल्प देख सकते हैं।
टिकट वितरण में उम्र और अनुभव बनेगा अहम मुद्दा
राजनीतिक दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और नई पीढ़ी की राजनीतिक भागीदारी के बीच संतुलन बनाने की है। एक तरफ वर्षों से पार्टी के लिए सक्रिय नेताओं को टिकट देने का दबाव है, वहीं दूसरी ओर युवा चेहरों को मौका देने की मांग भी लगातार उठ रही है।
235 दावेदारों ने बढ़ाई दोनों दलों की चिंता
भाजपा और कांग्रेस दोनों में टिकट को लेकर संभावित दावेदारों की संख्या बढ़ने से अंदरूनी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। वरिष्ठ नेताओं के साथ उनके समर्थक भी पार्टी नेतृत्व पर अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में अंतिम टिकट वितरण के दौरान जातीय समीकरण, स्थानीय पकड़, संगठन में सक्रियता, चुनावी जीत की संभावना और उम्र जैसे कई पहलू महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यदि वरिष्ठ दावेदारों को टिकट नहीं मिलता है तो पार्टी नेतृत्व को उनके समर्थकों और परिवार के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी रणनीति बनानी पड़ सकती है। यही वजह है कि आगामी टिकट वितरण दोनों प्रमुख दलों के लिए काफी संवेदनशील माना जा रहा है।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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