Category:
Viral News (वायरल समाचार)
State:
Rajasthan
2026-09-01 03:19:14
अलवर/लक्ष्मणगढ़। अलवर के लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र के बूटोली गांव में सोमवार शाम पतंग के पीछे दौड़ रहा 10 वर्षीय बालक हादसे का शिकार हो गया। पतंग पकड़ने के प्रयास में वह करीब 400 फीट गहरे खुले बोरवेल में जा गिरा और लगभग 60 फीट की गहराई पर फंस गया। घटना के बाद गांव में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए।
पतंग के पीछे दौड़ा 10 साल का मासूम 400 फीट गहरे बोरवेल में गिरा, 60 फीट पर अटका; 5 घंटे बाद सुरक्षित रेस्क्यू
अलवर/लक्ष्मणगढ़। अलवर के लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र के बूटोली गांव में सोमवार शाम पतंग के पीछे दौड़ रहा 10 वर्षीय बालक हादसे का शिकार हो गया। पतंग पकड़ने के प्रयास में वह करीब 400 फीट गहरे खुले बोरवेल में जा गिरा और लगभग 60 फीट की गहराई पर फंस गया। घटना के बाद गांव में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए।
जानकारी के अनुसार बालक अपने दोस्तों के साथ शाम करीब 5:45 बजे कटी हुई पतंग के पीछे दौड़ रहा था। इसी दौरान वह खुले बोरवेल में गिर गया। बोरवेल में पत्थर फंसने के कारण बालक नीचे नहीं गया और करीब 60 फीट की गहराई पर अटक गया। राहत की बात यह रही कि बालक को गंभीर चोट नहीं आई।
पाइप से पहुंचाई ऑक्सीजन, समानांतर गड्ढा खोदकर किया रेस्क्यू
हादसे की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। करीब 10 जवानों ने बचाव अभियान शुरू किया। बच्चे तक पहुंचने के लिए बोरवेल के समानांतर गड्ढा खोदने का काम शुरू किया गया, लेकिन पाइप धंसने की आशंका के चलते खुदाई रोकनी पड़ी।
बचाव दल ने बोरवेल में ऑक्सीजन पाइप पहुंचाकर बच्चे के लिए सांस लेने की व्यवस्था की। इसके बाद एसडीआरएफ के जवानों ने ग्रामीणों की मदद से बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास तेज किया।
करीब पांच घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद रात लगभग 11 बजे बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इसके बाद उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसकी स्थिति खतरे से बाहर बताई।
खुले बोरवेल फिर बने चिंता का कारण
घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में खुले और असुरक्षित बोरवेल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन और ग्रामीणों के लिए यह घटना चेतावनी है कि अनुपयोगी बोरवेल को तत्काल सुरक्षित तरीके से बंद किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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