Category:
Politics (राजनीति)
State:
Rajasthan
2026-09-04 04:19:22
जयपुर। राजस्थान में आगामी नगर निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रमुख दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने ही बागी प्रत्याशियों की बनी हुई है। पार्टी नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने कई स्थानों पर नाराज दावेदारों को मनाने के प्रयास किए, लेकिन इसके बावजूद 47 बागी प्रत्याशी चुनाव मैदान में डटे हुए हैं।
🗳️ निकाय चुनाव में बागियों ने बढ़ाई भाजपा-कांग्रेस की चिंता
मान-मनुहार के बाद भी 47 बागी मैदान में डटे, कई वार्डों में मुकाबला त्रिकोणीय
जयपुर। राजस्थान में आगामी नगर निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रमुख दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने ही बागी प्रत्याशियों की बनी हुई है। पार्टी नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने कई स्थानों पर नाराज दावेदारों को मनाने के प्रयास किए, लेकिन इसके बावजूद 47 बागी प्रत्याशी चुनाव मैदान में डटे हुए हैं।
नामांकन प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में प्रत्याशियों ने अपना पर्चा दाखिल किया था। नाम वापसी के बाद कई वार्डों में तस्वीर बदली है और अब मुकाबला सीधे दो प्रमुख दलों के बीच न रहकर त्रिकोणीय और बहुकोणीय होता दिखाई दे रहा है।
अपनों को साधने में जुटे दिग्गज
बागियों को मनाने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, विधायकों और स्थानीय पदाधिकारियों ने लगातार संपर्क किया। कई स्थानों पर व्यक्तिगत मुलाकात कर प्रत्याशियों से नाम वापस लेने की अपील की गई। इसके बावजूद जिन नेताओं और कार्यकर्ताओं को टिकट नहीं मिला, उनमें से कुछ ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला कायम रखा।
राजधानी जयपुर सहित कई निकाय क्षेत्रों में बागियों की मौजूदगी ने अधिकृत प्रत्याशियों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे वार्डों में बागी उम्मीदवार पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं और जीत-हार का अंतर भी प्रभावित कर सकते हैं। जयपुर में 35 से अधिक वार्डों में भाजपा-कांग्रेस से जुड़े बागी उम्मीदवारों के मैदान में रहने की रिपोर्ट सामने आई है।
अब प्रचार अभियान पर नजर
नामांकन वापसी के बाद चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। अब दोनों प्रमुख दलों के सामने अपने प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने के साथ-साथ बागियों के प्रभाव को सीमित करने की चुनौती है। आने वाले दिनों में वार्ड स्तर पर होने वाला प्रचार, स्थानीय समीकरण और निर्दलीय प्रत्याशियों की पकड़ चुनाव परिणामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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