Category:
Business (व्यापार)
State:
Delhi
2026-09-04 04:29:48
जयपुर। देश के विमानन क्षेत्र में बढ़ती परिचालन लागत और यात्रियों की मांग में नरमी का असर अब उड़ानों के संचालन पर दिखाई देने लगा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार जुलाई से सितंबर की अवधि के लिए एयरलाइंस ने अपनी निर्धारित उड़ानों में बड़ी संख्या में कटौती की है। इसका सीधा असर हवाई यात्रियों की उपलब्धता और किराए पर पड़ने की संभावना है।
✈️ ईंधन की बढ़ती लागत और कमजोर मांग से विमानन क्षेत्र पर दबाव, हजारों उड़ानों में कटौती
आसमान में घटा हवाई ट्रैफिक: जुलाई-सितंबर तिमाही में करीब 25 हजार उड़ानों की कमी, यात्रियों पर बढ़ा किराए का बोझ
जयपुर। देश के विमानन क्षेत्र में बढ़ती परिचालन लागत और यात्रियों की मांग में नरमी का असर अब उड़ानों के संचालन पर दिखाई देने लगा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार जुलाई से सितंबर की अवधि के लिए एयरलाइंस ने अपनी निर्धारित उड़ानों में बड़ी संख्या में कटौती की है। इसका सीधा असर हवाई यात्रियों की उपलब्धता और किराए पर पड़ने की संभावना है।
विमानन कंपनियों के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF), एयरपोर्ट शुल्क, विमान संचालन और अन्य परिचालन खर्च लगातार महत्वपूर्ण लागत बने हुए हैं। दूसरी ओर, कुछ मार्गों पर यात्रियों की मांग अपेक्षित स्तर पर नहीं रहने से एयरलाइंस को क्षमता को पुनर्गठित करने और कम मांग वाले सेक्टरों में उड़ानों की संख्या घटाने का निर्णय लेना पड़ रहा है।
कम उड़ानें, बढ़ सकती है किराए की चुनौती
उड़ानों की संख्या कम होने से प्रमुख घरेलू रूटों पर सीटों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। खासकर त्योहारी और व्यस्त यात्रा अवधि में मांग बढ़ने पर किराए में तेजी आने की संभावना से यात्रियों की चिंता बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार एयरलाइंस अब उन रूटों पर अधिक ध्यान दे रही हैं जहां यात्री मांग मजबूत है, जबकि कम मांग वाले सेक्टरों में उड़ानों की संख्या को व्यावसायिक जरूरत के अनुसार समायोजित किया जा रहा है।
एयरलाइंस के सामने लागत और मांग का दोहरा दबाव
विमानन उद्योग में ईंधन लागत का बड़ा महत्व है। इसके अलावा विमान किराया, रखरखाव, क्रू, एयरपोर्ट और अन्य संचालन खर्च भी कंपनियों की वित्तीय स्थिति को प्रभावित करते हैं। ऐसे में कंपनियां लागत नियंत्रण के साथ-साथ सीट क्षमता का बेहतर उपयोग करने पर जोर दे रही हैं।
हालांकि यात्रियों के लिए इसका एक सकारात्मक पहलू यह भी हो सकता है कि एयरलाइंस अधिक मांग वाले मार्गों पर बेहतर क्षमता और समय-सारिणी उपलब्ध कराने पर ध्यान दें। आने वाले महीनों में घरेलू हवाई यात्रा की मांग और ईंधन कीमतों की दिशा यह तय करेगी कि उड़ानों में कटौती का असर किराए पर कितना पड़ता है।
संवाददाता – श्रवण पंवार, जयपुर
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