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Category: Education (शिक्षा)    State: Rajasthan

2026-09-05 07:19:42

जयपुर। राजस्थान के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील व्यवस्था को लेकर बड़ी प्रशासनिक समस्या सामने आई है। बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाले स्कूलों में पुराने और खराब हो चुके बर्तनों को बदलने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से कुल 955 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत किए जाने के बावजूद प्रदेश के 53,738 स्कूलों में बर्तन और किचन उपकरणों की खरीद अब तक पूरी नहीं हो सकी है।

मिड-डे मील योजना में बड़ी लापरवाही: 955 करोड़ जारी, फिर भी 53,738 स्कूलों में बर्तनों की खरीद अटकी

जयपुर। राजस्थान के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील व्यवस्था को लेकर बड़ी प्रशासनिक समस्या सामने आई है। बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाले स्कूलों में पुराने और खराब हो चुके बर्तनों को बदलने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से कुल 955 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत किए जाने के बावजूद प्रदेश के 53,738 स्कूलों में बर्तन और किचन उपकरणों की खरीद अब तक पूरी नहीं हो सकी है।

जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार ने 595 करोड़ रुपये, जबकि राज्य सरकार ने 350 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। इसके बावजूद खरीद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाने से स्कूलों में मिड-डे मील तैयार करने वाले कर्मचारियों को पुराने बर्तनों के सहारे काम करना पड़ रहा है।

कहां अटका मामला?

शिक्षा विभाग के सामने मुख्य समस्या फंड ट्रांसफर और खरीद प्रक्रिया को लेकर बताई जा रही है। पुराने SNA सिस्टम से SNA स्पर्श व्यवस्था में बदलाव के दौरान वित्तीय लेन-देन की प्रक्रिया प्रभावित हुई। साथ ही स्कूलों को सीधे राशि देकर स्थानीय स्तर पर खरीद की बजाय केंद्रीकृत खरीद प्रक्रिया अपनाने के कारण भी देरी हुई है।

पांच साल पुराने बर्तन बदले जाने हैं

विभाग ने उन स्कूलों की सूची तैयार की है, जहां पांच वर्ष या उससे अधिक पुराने अथवा खराब हो चुके पतीले, कंटेनर, चूल्हे और भोजन परोसने के बर्तनों को बदला जाना है। विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर प्रत्येक स्कूल के लिए 10 हजार से 25 हजार रुपये तक की राशि निर्धारित की गई है।

केंद्र ने देरी पर जताई नाराजगी

केंद्र की ओर से खरीद प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होने को लेकर आपत्ति जताई गई है। विभागीय समीक्षा में भी इस मामले को गंभीरता से लिया गया है। अब सवाल यह है कि राशि स्वीकृत होने के बाद भी स्कूलों तक खरीद की सुविधा पहुंचने में इतनी देरी क्यों हो रही है और बच्चों के भोजन की व्यवस्था से जुड़े बुनियादी संसाधनों को कब तक उपलब्ध कराया जाएगा।

संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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