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Viral News (वायरल समाचार)
State:
Delhi
2026-09-09 03:29:08
नई दिल्ली। अमेरिका में स्थायी निवास हासिल करने के लिए निवेश आधारित EB-5 इमिग्रेंट इन्वेस्टर प्रोग्राम भारतीय आवेदकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक EB-5 की पांच प्रमुख श्रेणियों में भारतीयों की ओर से बड़ी संख्या में आवेदन किए गए हैं और इस मामले में भारत ने चीन को पीछे छोड़ दिया है।
₹7.5 करोड़ के निवेश से अमेरिकी स्थायी वीजा की राह, EB-5 में भारतीयों की बढ़ी हिस्सेदारी; चीन पीछे
नई दिल्ली। अमेरिका में स्थायी निवास हासिल करने के लिए निवेश आधारित EB-5 इमिग्रेंट इन्वेस्टर प्रोग्राम भारतीय आवेदकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक EB-5 की पांच प्रमुख श्रेणियों में भारतीयों की ओर से बड़ी संख्या में आवेदन किए गए हैं और इस मामले में भारत ने चीन को पीछे छोड़ दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित अवधि में करीब 12,900 भारतीयों ने अमेरिकी स्थायी वीजा के लिए आवेदन किया, जबकि चीन से लगभग 9,875 आवेदन सामने आए। EB-5 कार्यक्रम के तहत पात्र निवेशकों को अमेरिका में निर्धारित निवेश करने और रोजगार सृजन की शर्तों को पूरा करने पर स्थायी निवास की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।
करीब ₹7.5 करोड़ का निवेश जरूरी
अमेरिका के EB-5 कार्यक्रम में निवेश की राशि भारतीय मुद्रा में करीब ₹7.5 करोड़ तक बैठती है। इस निवेश के साथ आवेदक को निर्धारित शर्तों के अनुसार अमेरिकी अर्थव्यवस्था में रोजगार सृजन से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करना होता है। इसी वजह से यह कार्यक्रम मुख्य रूप से उच्च-निवल-मूल्य वाले निवेशकों और कारोबारियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
भारतीयों की बढ़ती दिलचस्पी के पीछे कई कारण
विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय निवेशकों की रुचि बढ़ने के पीछे बच्चों की उच्च शिक्षा, परिवार के लिए दीर्घकालिक निवास, कारोबारी अवसर और अमेरिकी बाजार तक पहुंच जैसे कारण महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, केवल निवेश करने से वीजा या स्थायी निवास की गारंटी नहीं होती और आवेदन को अमेरिकी इमिग्रेशन नियमों के तहत निर्धारित जांच व पात्रता प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
‘ट्रम्प गोल्ड कार्ड’ से अलग है EB-5
समाचार रिपोर्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से प्रस्तावित ‘गोल्ड कार्ड’ का भी उल्लेख है। रिपोर्ट के मुताबिक इसमें बहुत बड़े निवेश के बदले अमेरिका में स्थायी निवास की दिशा में विशेष व्यवस्था का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि, EB-5 और प्रस्तावित गोल्ड कार्ड अलग-अलग कार्यक्रम हैं, इसलिए दोनों को एक ही योजना मानना सही नहीं होगा।
अमेरिकी आव्रजन नीति में लगातार बदलाव के बीच भारतीय निवेशकों की बढ़ती भागीदारी यह संकेत देती है कि अमेरिका में स्थायी निवास के लिए निवेश आधारित मार्ग को लेकर भारत में रुचि लगातार मजबूत हो रही है। हालांकि, अंतिम निर्णय लेने से पहले निवेशकों के लिए मौजूदा अमेरिकी इमिग्रेशन नियमों और आधिकारिक पात्रता शर्तों की जांच करना जरूरी है।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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